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Supreme Court: पूर्व केंद्रीय मंत्री टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को जमानत, दिल्ली या लखनऊ में रहने का निर्देश

Mon, 22 Jul 2024 10:18 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 22 Jul 2024 10:18 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश को निरपेक्ष बनाया गया है। हमें सूचित किया गया है कि 117 गवाहों में से अब तक सात की जांच की जा चुकी है। हमारे विचार में मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने की जरूरत है।

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Supreme Court Updates SC gives bail to Ashish Mishra in 2021 Lakhimpur Kheri violence case Know all
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर-खीरी हिंसा मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को जमानत दी। कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर करने के बाद उन्हें दिल्ली या लखनऊ में रहने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधीनस्थ अदालत को मामले की सुनवाई में तेजी लाने और समयसीमा तय करने का निर्देश दिया।

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बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा आठ लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद उनके दिल्ली या लखनऊ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। पिछले साल 25 जनवरी को शीर्ष अदालत ने हिंसा की दुर्भाग्यपूर्ण भयावह घटना में आशीष मिश्रा को अंतरिम जमानत दी थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने मामले में किसानों को भी जमानत दी और ट्रायल कोर्ट को सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया।
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पीठ ने कहा कि सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश को निरपेक्ष बनाया गया है। हमें सूचित किया गया है कि 117 गवाहों में से अब तक सात की जांच की जा चुकी है। हमारे विचार में मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने की जरूरत है। हम ट्रायल कोर्ट को निर्देश देते हैं कि वह लंबित अन्य समयबद्ध या जरूरी मामलों को ध्यान में रखते हुए समय-सारिणी तय करे, लेकिन लंबित विषय को प्राथमिकता दे।
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क्या है मामला?
जिले में हिंसा तब भड़की थी, जब किसानों ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के क्षेत्र के दौरे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान चार किसानों को एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहन ने कुचल दिया था। इसके बाद एक ड्राइवर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं को गुस्साए किसानों ने कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला था। इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी को दिए निर्देश

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि 2006 के निठारी सिलसिलेवार हत्याकांड मामले में सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर उसे नोटिस सौंप दिया गया है। न्यायालय की रजिस्ट्रार सुजाता सिंह ने कहा कि एक पीड़ित के पिता पप्पू लाल की अपील पर न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर से जारी नोटिस कोली को नहीं दिया गया है, जो गाजियाबाद की डासना जेल में बंद है। न्यायालय के 18 जुलाई के आदेश में कहा गया, “गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी से भी यह बात स्पष्ट करवाई जाए। इसके बाद एसएसपी गौतमबुद्ध नगर के माध्यम से प्रतिवादी संख्या 1 (सुरेंद्र कोली) को नोटिस जारी किया जाए।”

अदालत ने मामले को चार सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया और कहा कि उच्च न्यायालय व निचली अदालत की ओर से मामले के रिकॉर्ड का इंतजार है। उल्लेखनीय है कि 19 जुलाई को शीर्ष अदालत ने 2006 के सनसनीखेज निठारी हत्याकांड मामले में कोली को बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई और उत्तर प्रदेश सरकार की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। यह सनसनीखेज हत्याकांड 29 दिसंबर 2006 को राष्ट्रीय राजधानी से सटे नोएडा के निठारी में मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने के बाद सामने आया था। पंधेर भी इस मामले में आरोपी था।
 

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