फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Updates double murder case Andhra Pradesh ex MLA anticipatory bail rejection

Supreme Court Updates: 'गरीबों को न्याय दिलाने के लिए आधी रात तक बैठने को तैयार', कोर्ट में बोले CJI सूर्यकांत

Fri, 28 Nov 2025 05:01 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 28 Nov 2025 05:01 PM IST
सार

Supreme Court Updates: सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक पिन्नेली राम कृष्णा रेड्डी और उनके भाई की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, एक सुनावई के दौरान मुख्य न्यायधीश ने कहा कि वो गरीब और कमजोर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए आधी रात तक अदालत में बैठने को तैयार हैं। 

विज्ञापन
Supreme Court Updates double murder case Andhra Pradesh ex MLA anticipatory bail rejection
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

नए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को समय पर न्याय दिलाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उनके सामने लक्जरी लिटिगेशन की कोई जगह नहीं है और वह केवल उन मामलों के लिए आधी रात तक भी अदालत में बैठने को तैयार हैं, जिनमें जरूरतमंद लोगों का हक जुड़ा हो। यह टिप्पणी उन्होंने जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ बैठकर उस समय दिया जब उन्होंने तिलक सिंह डांगी की केंद्र के खिलाफ दायर याचिका को खारिज किया।

विज्ञापन


सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि उनका पूरा ध्यान सबसे छोटे और आखिरी पंक्ति में खड़े गरीब नागरिक पर केंद्रित रहेगा। हरियाणा के हिसार की मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। वे लगभग 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे और 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी करने पर रिटायर होंगे। उन्होंने दोहराया कि अदालतों का असली उद्देश्य सुविधा सम्पन्नों की लड़ाइया लड़ना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को समयबद्ध न्याय देना है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- निकाय चुनाव से पहले महायुति में घमासान, MVA की बढ़ी उम्मीद; OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की तलवार
विज्ञापन
विज्ञापन


दोहरे हत्याकांड में आंध्र प्रदेश के पूर्व MLA को दो हफ्ते में सरेंडर का आदेश
एक और दोहरे हत्याकांड मामले में कोर्ट ने सुनवाई की। इससे जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक पिन्नेली राम कृष्णा रेड्डी और उनके भाई पिन्नेली वेंकटरामी रेड्डी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों के असाधारण पहुंच पर सवाल उठाए। साथ ही कहा कि जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए बयानों की प्रतियां आरोपियों तक कैसे पहुंचीं। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि यह खुद एक संकेत है कि कहीं न कहीं साजिश की गंध आती है। अदालत ने साफ कहा कि चार्जशीट दाखिल होने से पहले ही जांच से जुड़े दस्तावेजों का आरोपियों तक पहुंचना बेहद चिंताजनक है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि आरोपियों को जांच की अंतरंग जानकारी कैसे मिली।

अदालत ने इसे जांच में सीधा दखल बताया और कहा कि यह तरीका स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपी दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करें। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि जिस तरीके से दस्तावेज हासिल किए गए, वह बताता है कि जांच प्रभावित करने की कोशिश हुई है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से बताया गया कि आरोपियों ने जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए बयानों की प्रतियां अदालत में दाखिल की हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि ऐसी प्रतियां उन्हें कैसे मिलीं, जबकि केस डायरी कभी भी सार्वजनिक नहीं की जाती। आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है और आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। हालांकि अदालत ने उनकी दलील पर संतोष नहीं जताया और कहा कि आरोपियों की पहुंच चौकाने वाली है।

आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने भी चिंता जताते हुए कहा कि जांच महत्वपूर्ण चरण में है और ऐसे में जमानत मिलने से जांच प्रभावित होगी। इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अगस्त में अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि दोनों आरोपी जे. वेंकटेश्वरलु और जे. कोटेश्वर राव की मई में हुई हत्या के मुख्य षड्यंत्रकारी हैं। हाई कोर्ट ने माना था कि इस समय जमानत मिलने से जांच बाधित होगी। यही आदेश सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। दोहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राहत जताई है। उनका कहना है कि आरोपियों की राजनीतिक पहुंच के कारण अब तक जांच के प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब उम्मीद है कि जांच बिना दबाव के पूरी हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने मामले की दिशा और गंभीरता को साफ कर दिया है।

विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को स्टाइपेंड न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, गुजरात सरकार से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में इंटर्नशिप कर रहे विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को स्टाइपेंड न मिलने के मुद्दे पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वरले की पीठ ने बेलारूस मेडिकल स्टूडेंट्स पैरेंट्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया कि स्टाइपेंड न देना न सिर्फ कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करता है। याचिका के अनुसार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियम और 2022 व 2023 की सर्कुलर स्पष्ट करते हैं कि विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को भारतीय छात्रों के बराबर स्टाइपेंड मिलना चाहिए। छात्रों का कहना है कि वे भोजन, आवास और यात्रा का खर्च खुद उठा रहे हैं और बिना स्टाइपेंड के इंटर्नशिप करना उनके लिए मजबूरी बन गया है। याचिका में यह भी आरोप है कि छात्रों पर स्टाइपेंड न मांगने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कोर्ट ने इस मामले को समान मुद्दों वाली अन्य लंबित याचिकाओं के साथ टैग कर दिया है।

केरल में कुलपतियों की नियुक्ति रिपोर्ट कागज का टुकड़ा नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केरल के राज्यपाल और कुलाधिपति राजेंद्र आर्लेकर के दो विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति पर सुधांशु धूलिया समिति की रिपोर्ट पर संज्ञान नहीं लेने पर गंभीर आपत्ति जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि रिपोर्ट महज कागज का एक साधारण टुकड़ा नहीं है और राज्यपाल इस पर फैसला करने के लिए बाध्य हैं।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने राज्यपाल से कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पर विचार करें और 5 दिसंबर को इस अदालत को अपने निर्णय से अवगत कराएं। पीठ ने यह आदेश तब पारित किया जब केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने बताया कि धूलिया समिति की रिपोर्ट के आधार पर दो कुलपतियों की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की ओर से भेजी गई सिफारिश पर राज्यपाल ने कोई निर्णय नहीं लिया है। एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और डिजिटल विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के लिए कुलपतियों की नियुक्ति की जानी है।

राज्यपाल से रिपोर्ट पर गौर करे की अपेक्षा
पीठ ने कहा कि कुलाधिपति (राज्यपाल) से अपेक्षा की जाती है कि वह जस्टिस धूलिया की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से दी गई रिपोर्ट पर गौर करें। कुलाधिपति की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) धूलिया और मुख्यमंत्री की रिपोर्ट तो प्राप्त हो गई है, लेकिन उन नामों से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त नहीं हुए हैं, जिनकी कुलपति पद के लिए सिफारिश की गई है। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, हम समझ नहीं पा रहे हैं कि समिति की ओर से दायर रिपोर्ट की जांच में रिकॉर्ड न मिलने से क्या बाधा आ रही है। ऐसी परिस्थितियों में, अब हम उम्मीद करते हैं कि कुलाधिपति समिति की रिपोर्ट के अनुसार ही कोई निर्णय लेंगे। हम सभी को याद दिलाना चाहते हैं कि समिति का गठन सभी पक्षों की सहमति से किया गया था।

वकील से तुरंत निर्देश लेने को कहा
पीठ ने राज्यपाल की ओर से पेश वकील से कहा कि वे अदालत कक्ष से बाहर जाएं और निर्देश प्राप्त करें तथा बयान दें कि निर्णय कब लिया जा सकता है। वकील ने कहा कि कुछ मुद्दे हैं जिन पर गौर करने की जरूरत है। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, हम आपको आगे कोई दलील देने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। यह कोई साधारण कागज नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जस्टिस ने इस पर गौर किया है। यह देश का कानून है। इसलिए आपको रिपोर्ट पर गौर करना होगा और उचित निर्णय लेना होगा। हम आपसे उम्मीद करते हैं कि आप रिपोर्ट पर कोई फैसला लेंगे। जब फैसला हमारे सामने रखा जाएगा, तो हम तय करेंगे कि फैसला सही है या गलत। इसके बाद वकील की और से फिर समय मांगे जाने पर पीठ ने मामले की सुनवाई अगले शुक्रवार के लिए निर्धारित की।

शिकायतकर्ता अपने बैंक के क्षेत्राधिकार वाली अदालत में ही कर सकेगा चेक बाउंस मामला: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में साफ कर दिया कि चेक बाउंस का मामला उसी अदालत में दर्ज किया जा सकता है, जिसके क्षेत्राधिकार में शिकायतकर्ता का बैंक शाखा आता है। इस तरह अदालतों के क्षेत्राधिकार को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी उलझन पर शीर्ष अदालत ने स्पष्टता प्रदान की है। आम तौर पर धारा 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 के तहत चेक मामलों में यह विवाद उठता रहा है कि मामला किस अदालत में दायर किया जाए। यह धारा बैंक खाते में धनराशि की कमी के कारण चेक बाउंस होने से संबंधित है।

जस्टिस जे बी पारडिवाला और आर महादेवन की पीठ ने कुछ स्थानांतरण याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि जिस बैंक में प्राप्तकर्ता (पेयी) का खाता है, उसी क्षेत्र की अदालत को मामले की सुनवाई का अधिकार होगा। पीठ ने अपने फैसले में 2015 के नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) अधिनियम का भी उल्लेख किया और कहा कि इस संशोधन से पहले क्षेत्राधिकार से जुड़ा मुद्दा काफी जटिल था। याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता कौस्तुभ शुक्ला के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग को फटकारा, कहा- फिजूल अपीलों से बढ़ रहा बोझ
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आयकर विभाग को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि पहले से तय मामलों में भी अपील दायर करना न्यायपालिका पर अनावश्यक बोझ बढ़ा रहा है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ ने कहा कि विभाग की यह प्रवृत्ति लंबित मामलों की संख्या बढ़ा रही है और न्यायिक समय की बर्बादी का कारण बन रही है। पीठ ने असहमति जताते हुए कहा कि जब शीर्ष अदालत पहले ही अपने पुराने फैसले के आधार पर विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर चुकी है, तो विभाग को दोबारा ऐसी याचिकाएँ दायर करने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे फिजूल मामलों की फाइलिंग केवल डॉकेट एक्सप्लोजन का कारण बनती है।


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आयकर विभाग को एक स्पष्ट मुकदमेबाजी नीति बनानी चाहिए, ताकि अनावश्यक अपीलों पर रोक लग सके। अदालत इससे पहले भी विभाग को अपने ही सर्कुलर्स का पालन न करने पर फटकार लगा चुकी है। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक समय बेहद मूल्यवान है और विभाग को जिम्मेदारी के साथ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, न कि बोझ बढ़ाने वाले कदम।

पूर्व सीजेआई की विरासत मेरे लिए मानक: सीजेआई सुर्या कांत
मुख्य न्यायाधीश सुर्या कांत ने शुक्रवार को कहा कि देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों की दृष्टि और नेतृत्व उनके लिए आगे काम करने का मानक निर्धारित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वे बार संगठनों और वकीलों के साथ मिलकर लंबित मुद्दों को सुलझाने पर काम करेंगे। सीजेआई कांत ने बताया कि उन्होंने एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह और एससीएओआरए प्रमुख विपिन नायर से मेंशनिंग और केस लिस्टिंग प्रणाली को सुव्यवस्थित करने पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि 1 दिसंबर से नई लिस्टिंग व्यवस्था लागू होगी। कांत ने स्वीकार किया कि शुरू में कुछ कठिनाइयां होंगी, लेकिन सहयोग से इनका समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व सीजेआई के कार्यों की समीक्षा कर यह समझने की कोशिश की जाएगी कि उनकी दृष्टि को पूरा करने में कितना सफर बाकी है। सीजेआई ने कहा कि न्यायिक सुधारों में उनके साथी न्यायाधीशों का समर्थन उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बार, बेंच और आम अपील को निराश नहीं किया जाएगा और न्यायपालिका को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम जारी रहे



विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed