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सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: BCI के हर नीतिगत फैसले में AG-SG की भागीदारी जरूरी; ऑयल इंडिया को नई याचिका की इजाजत

Wed, 02 Sep 2026 01:50 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 02 Sep 2026 01:50 PM IST
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Supreme Court Updates Directs BCI Policy Decision to Involve AG and SG, Allow Oil India Fresh Plea on Drilling
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला ग्रापिक
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से जुड़े एक मामले में अहम निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बीसीआई की ओर से लिए जाने वाले हर नीतिगत फैसले में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को सक्रिय रूप से शामिल किया जाए। वहीं, एक अन्य मामले में शीर्ष अदालत ने ऑयल इंडिया लिमिटेड को असम के डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क के नीचे हाइड्रोकार्बन निकालने से जुड़ी ड्रिलिंग परियोजना पर नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दी।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता और उन्हें पद से हटाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बीसीआई द्वारा लिए जाने वाले प्रत्येक नीतिगत फैसले में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। यह निर्देश बीसीआई के कामकाज से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया। याचिका में दावा किया गया है कि मनन कुमार मिश्रा पहली बार 2012 तक बीसीआई के अध्यक्ष चुने गए थे। उन्होंने 2014 में कुछ समय के लिए पद छोड़ा, लेकिन उसी साल नवंबर में दोबारा अध्यक्ष बने और तब से पद पर बने हुए हैं।
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ऑयल इंडिया को सुप्रीम कोर्ट ने नई याचिका दाखिल करने को क्यों कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने ऑयल इंडिया को लंबित मामले में दाखिल इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन वापस लेकर इसी मुद्दे पर नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है। कंपनी ने डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क के नीचेएक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग (ERD) तकनीक से हाइड्रोकार्बन निकालने की अनुमति मांगी है। ऑयल इंडिया के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने जल्द सुनवाई की मांग करते हुए बताया कि ड्रिलिंग का ढांचा पार्क की सीमा से बाहर रहेगा और करीब 4,000 मीटर नीचे जाकर क्षैतिज दिशा में आगे बढ़ेगा। कंपनी का दावा है कि यह पारंपरिक खनन की श्रेणी में नहीं आता। उसने वन सलाहकार समिति और पर्यावरण मंत्रालय के फैसले को चुनौती दी है। कंपनी के मुताबिक, अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के उस आदेश को गलत तरीके से लागू किया, जिसमें संरक्षित क्षेत्रों और उनके एक किलोमीटर दायरे में खनन पर रोक लगाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी।
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