SC Updates: तिरुमाला-लड्डू विवाद में समीक्षा समिति के खिलाफ सुनवाई से 'सुप्रीम' इनकार, कोर्ट में आज अहम सुनवाई
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सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से नियुक्त एक सदस्यीय समिति को तिरुमाला लड्डू विवाद पर एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट की समीक्षा करने से रोकने से इन्कार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने 4 अक्तूबर, 2024 को तिरुपति लड्डू बनाने में पशु की चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय स्वतंत्र एसआईटी का गठन किया था।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से एक सदस्यीय समिति की नियुक्ति एक समानांतर जांच स्थापित करने के समान है। इससे एसआईटी की जांच प्रभावित होगी। याचिका में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की ओर से इस विवाद पर दिए गए बयानों को भी चुनौती दी गई।
सीजेआई ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईटी की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और मामला विचाराधीन है क्योंकि दो आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें एक पूरक आरोपपत्र भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रशासनिक जांच को उन आपराधिक कार्यवाही के साथ अतिव्यापी नहीं कहा जा सकता जिनके आधार पर आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दायर किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी की याचिका पर सुनवाई टाली
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से सुनवाई टल गई। अब इस मामले की 26 फरवरी को सुनवाई होगी। गीतांजलि ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मामले में अपने पति वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तारी को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। वांगचुक जोधपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई स्थगित की। इससे पहले अदालत ने केंद्र सरकार से वांगचुक की सेहत को देखते हुए हिरासत पर पुनर्विचार की संभावना पूछी थी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा था कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए वांगचुक सीधे तौर पर जिम्मेदार थे, जिसमें चार लोगों की मौत और 161 लोग घायल हुए थे। केंद्र और लद्दाख प्रशासन का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए लोगों को भड़काने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने कहा कि रासुका के तहत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।