फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Update Supreme Court to hear Bar Council election case on Tuesday News In Hindi

SC Updates: बार काउंसिल चुनाव की निगरानी करने वाली समिति पर FIR, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा सुनवाई

Mon, 09 Mar 2026 01:24 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 09 Mar 2026 01:24 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court Update Supreme Court to hear Bar Council election case on Tuesday News In Hindi
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए बनाई गई हाई-पावर कमेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस बात की जानकारी दी। इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकिल मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि एक वकील ने समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

विज्ञापन

मिश्रा ने कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है। उनके अनुसार, एक वकील की अपील पर विचार नहीं किया गया, इसलिए उसने समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। यह मामला महाराष्ट्र और गोवा राज्य बार काउंसिल चुनाव से जुड़ा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामले की सुनवाई मंगलवार को की जाएगी।

विज्ञापन

राज्य बार काउंसिल के लिए विशेष समिति का गठन
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाई थी। इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया हैं। इसके अन्य सदस्य न्यायमूर्ति रवि शंकर झा जो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, और वरिष्ठ वकील वी गिरी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन


इसके अलावा 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि राज्य बार काउंसिल चुनाव से जुड़े किसी भी मामले की याचिका सीधे अदालत में सूचीबद्ध न की जाए। यदि किसी को शिकायत है, तो वह पहले अदालत द्वारा बनाई गई इस समिति के पास जाए।

चुनाव पारदर्शी कराने पर जोर
मामले में सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पूरे देश में बार काउंसिल चुनाव समय पर, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराए जाएं। इसी वजह से अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि सभी राज्यों में बार काउंसिल चुनाव सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की निगरानी में कराए जाएं और इसके लिए अंतिम तारीख 31 जनवरी 2026 तय की गई थी।

दिल्ली दंगे : केस डायरी दोबारा तैयार करने की कलिता की याचिका शीर्ष कोर्ट ने ठुकराई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों की आरोपी छात्र कार्यकर्ता देवांगना कलिता की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2020 के दंगों से संबंधित अपने खिलाफ चल रही जांच में केस डायरी को फिर से तैयार करने की मांग की थी। केस डायरी को दोबारा तैयार करना एक कानूनी प्रक्रिया है जो जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2025 के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया, जिसमें देवांगना की याचिका को आंशिक रूप से खारिज कर दिया गया था। छात्र कार्यकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष द्वारा उसके खिलाफ उपलब्ध कराई गई कुछ सामग्री पुरानी तारीख की थी और जाली प्रतीत होती थी। पीठ ने याचिका के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुकदमा तीन साल पहले शुरू हुआ था। जस्टिस कुमार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 172(3) (आरोपी को केस डायरी तक पहुंच का अधिकार नहीं) का हवाला देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

पिछले साल 22 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने देवांगना की केस डायरी को दोबारा तैयार किए जाने की याचिका को आंशिक रूप से खारिज कर दिया था, लेकिन दस्तावेज को सुरक्षित रखने के याचिकाकर्ता के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था। इससे पहले, दो दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर दिल्ली पुलिस को केस डायरी को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।

न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने का केंद्र का प्रस्ताव मंजूर

सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल 8 सितंबर तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये अध्यक्ष और सदस्य जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। सीजेआई ने एक बार फिर न्यायाधिकरणों की जवाबदेही की कमी पर सवाल उठाया और कहा कि उन्हें किसी अथॉरिटी के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। वे सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं हैं और वे हमारे प्रति भी जवाबदेह नहीं हैं। उनकी ईमानदारी और परफॉर्मेंस को कौन जांचेगा?

उन्होंने कहा कि सिर्फ एक बड़े आदेश से विस्तार देने के बजाय, हमें उनकी जवाबदेही पर भी विचार करना होगा। वे किसके प्रति जवाबदेह हैं? सीजेआई ने कहा कि कोई तंत्र होना चाहिए। अगर उनका काम ठीक नहीं है तो उनका कार्यकाल क्यों बढ़ाया जाना चाहिए? नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल सुधार कानून 2021 के उन प्रावधानों को रद्द कर दिया था जो केंद्र को सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल पर अत्यधिक नियंत्रण देते थे। शीर्ष अदालत ने नियमों को अपने पहले के फैसलों का उल्लंघन बताया था।

कैट बार एसोसिएशन की ओर से पेश सीनियर वकील संजय जैन ने कहा कि मद्रास बार एसोसिएशन के पिछले साल के फैसले में सदस्यों के लिए कम से कम पांच साल का समय जरूरी किया गया था और करीब 31 सदस्य जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि एक और चिंता यह है कि जब न्यायिक सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं तो प्रशासनिक सदस्य को न्यायाधिकरण के कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर काम करने की इजाजत होती है। जैन ने कहा कि कुछ मामलों में कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी उठा है कि क्या प्रशासनिक सदस्य पीठ की अध्यक्षता कर सकते हैं। इस पर सीजेआई ने कहा कि न्यायाधिकरण के कामकाज से जुड़े एक और मामले में पीठ ने पहले भी यही चिंता जताई थी। एक कानून होना चाहिए जो न्यायाधिकरण के सदस्यों की जवाबदेही तय करे। आप न्यायाधिकरण को सरकारी नियंत्रण में नहीं रख सकते, क्योंकि इसकी आलोचना होगी। आप उन्हें न्यायिक नियंत्रण में भी नहीं रख सकते। 

बजट सत्र या मानसून सत्र में सरकार लाएगी नया बिल
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि केंद्र सरकार न्यायाधिकरणों के कामकाज और उनके सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ा एक नया ट्रिब्यूनल बिल या तो मौजूदा बजट सत्र या संसद के मानसून सत्र में लाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के अलग-अलग स्तर पर अभी बातचीत चल रही है। न्यायाधिकरणों के काम करने में किसी भी भ्रम या समस्या से बचने के लिए, इस साल 8 सितंबर तक सेवानिवृत्त होने वाले सभी 21 सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक प्रस्ताव पर काम कर रही है। एक बिल पर विचार किया जा रहा है। हम इस बीच कोई रुकावट नहीं चाहते। ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 के तहत नियुक्त सभी लोग बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगले सितंबर तक या तो इस बजट सत्र में या मानसून सत्र में एक नया कानून लागू होने की संभावना है। वेंकटरमणी ने कहा कि नया बिल पिछले साल के फैसले के अनुसार होगा और अलग-अलग न्यायाधिकरणों में सदस्यों के काम करने के तरीके और नियुक्ति को आसान बनाएगा।

आयकर का तलाशी एवं जब्ती प्रावधान बड़े कर चोरों से निपटने के लिए, याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत तलाशी एवं जब्ती की शक्तियों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में दावा किया गया था कि अधिकारी ऐसी शक्तियों का दुरुपयोग कर सकते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे प्रावधान बड़े कर चोरों से निपटने के लिए बनाए गए हैं।

पीठ ने कहा कि शुरू में यह प्रावधान साधारण लग सकता है लेकिन इसे बड़े अपराधियों को पकड़ने के लिए बनाया गया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ प्रावधान ऐसे भी हैं जिनका दुरुपयोग संभव है लेकिन समय के साथ उन्हें सुव्यवस्थित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, ये प्रावधान अक्सर बड़े कर चोरों आदि के लिए होते हैं। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े की इस दलील से असहमति जताई कि यह प्रावधान असांविधानिक है। वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा इस प्रावधान के संबंध में उठाई गई मुख्य चिंता यह थी कि यह कर अधिकारियों को करदाता या आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को तलाशी के कारणों का खुलासा करने से छूट देता है। 

 पीठ ने याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया और इसके बाद याचिका वापस ले ली गई। हालांकि, पीठ ने जनहित याचिका के याचिकाकर्ता विश्वप्रसाद अल्वा को प्रावधान में संशोधन या स्पष्टीकरण की मांग करने वाले अभ्यावेदन के साथ केंद्र का रुख करने की अनुमति दे दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed