SC Updates: लखीमपुर हिंसा केस में आशीष मिश्रा को राहत; जानें शीर्ष अदालत में किन मामलों पर क्या सुनवाई हुई
Supreme Court Hearings: सुप्रीम कोर्ट में आज कई मामलों में सुनवाई हुई। इसमें प्रज्जवल रेवन्ना का केस और लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर भी सुनवाई हुई। ऐसे में इस खबर में जानेंगे आज सुप्रीम कोर्ट में किन अहम मामलों में क्या सुनवाई हुई।
विस्तार
सुनवाई के दौरान यूपी के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी जज के सामने कुल 789 मुकदमे लंबित हैं, जिसकी वजह से ट्रायल की गति प्रभावित हो रही है। इस पर सीजेआई ने अतिरिक्त अदालतें स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि एक ही जज पर इतने मुकदमे का भार तर्कसंगत नहीं। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से न्यायिक ढांचे को मजबूत करने में मिल रहे सहयोग का भी उल्लेख किया। आशीष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने 25 दिसंबर से 1 जनवरी तक घर जाने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने 25 से 31 दिसंबर तक जाने की अनुमति देते हुए कहा कि पूर्व में तय सभी शर्तें लागू रहेंगी। मिश्रा को किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होने की भी पाबंदी जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की ट्रायल ट्रांसफर याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व जेडी(एस) सांसद प्रज्वल रेवन्ना की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दो लंबित बलात्कार मामलों की सुनवाई बंगलूरू की 81वीं अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सेशंस कोर्ट से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी। रेवन्ना ने दलील दी थी कि मौजूदा ट्रायल जज पहले ही उन्हें एक अन्य बलात्कार मामले में दोषी ठहरा चुके हैं, इसलिए उनके निष्पक्ष ट्रायल की संभावना कम है। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने कहा कि जज की टिप्पणियां रिकॉर्ड और कर्नाटक हाईकोर्ट के अवलोकनों के आधार पर थीं और इन्हें पक्षपात का आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ट्रायल जज पुराने फैसले से प्रभावित हुए बिना वर्तमान मामलों का निर्णय सबूतों के आधार पर करेंगे।
मामला रेवन्ना के खिलाफ दायर गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिनमें दोहराया गया बलात्कार, छेड़छाड़, धमकी, सबूत नष्ट करना और आईटी एक्ट के तहत गोपनीयता उल्लंघन शामिल हैं। आरोप तब सामने आए जब करीब 2,900 कथित आपत्तिजनक वीडियो ऑनलाइन प्रसारित हुए थे। रेवन्ना को इसी साल अगस्त में एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और वे वर्तमान में बंगलूरू की केंद्रीय जेल में बंद हैं। सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने ट्रायल जज की टिप्पणियों को हटाने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी ठुकरा दिया और कहा कि इस तरह के आरोप न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने जैसे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की ट्रायल ट्रांसफर याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व जेडी(एस) सांसद प्रज्वल रेवन्ना की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दो लंबित बलात्कार मामलों की सुनवाई बंगलूरू की 81वीं अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सेशंस कोर्ट से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी। रेवन्ना ने दलील दी थी कि मौजूदा ट्रायल जज पहले ही उन्हें एक अन्य बलात्कार मामले में दोषी ठहरा चुके हैं, इसलिए उनके निष्पक्ष ट्रायल की संभावना कम है। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने कहा कि जज की टिप्पणियां रिकॉर्ड और कर्नाटक हाईकोर्ट के अवलोकनों के आधार पर थीं और इन्हें पक्षपात का आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ट्रायल जज पुराने फैसले से प्रभावित हुए बिना वर्तमान मामलों का निर्णय सबूतों के आधार पर करेंगे।
मामला रेवन्ना के खिलाफ दायर गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिनमें दोहराया गया बलात्कार, छेड़छाड़, धमकी, सबूत नष्ट करना और आईटी एक्ट के तहत गोपनीयता उल्लंघन शामिल हैं। आरोप तब सामने आए जब करीब 2,900 कथित आपत्तिजनक वीडियो ऑनलाइन प्रसारित हुए थे। रेवन्ना को इसी साल अगस्त में एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और वे वर्तमान में बंगलूरू की केंद्रीय जेल में बंद हैं। सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने ट्रायल जज की टिप्पणियों को हटाने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी ठुकरा दिया और कहा कि इस तरह के आरोप न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने जैसे हैं।
आदिवासी युवक की मौत की जांच के लिए एसआईटी गठित, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को सुप्रीम कोर्ट से राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के 27 वर्षीय आदिवासी युवक निलेश आदिवासी की संदिग्ध मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। गुरुवार को सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने मध्यप्रदेश पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि दो दिनों के भीतर एसआईटी का गठन किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि एसआईटी में दो एसएसपी रैंक के अधिकारी शामिल होंगे, जो मध्यप्रदेश के मूल निवासी नहीं होंगे, जबकि तीसरा सदस्य एक महिला डीएसपी होंगी। न्यायालय ने कहा कि जांच निष्पक्ष और तेज होनी चाहिए तथा एक माह के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए।
मामला तब सुर्खियों में आया था जब निलेश आदिवासी ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में उसने दावा किया कि उससे जबरन शिकायत कराई गई थी। इसके तुरंत बाद उसने आत्महत्या कर ली और उसकी मौत के मामले में राजपूत के खिलाफ नया केस दर्ज हुआ। हाईकोर्ट ने पहले उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी। कोर्ट ने कहा कि एसआईटी सभी कोणों से जांच करेगी, जिसमें वे पहलू भी शामिल होंगे जिनकी पहले जांच नहीं की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अदालतें रखें ध्यान, अवमानना की शक्ति न तो जजों का कवच न ही चुप कराने की तलवार
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दया न्यायिक विवेक का अभिन्न अंग बनी रहनी चाहिए और अवमानना करने वाले व्यक्ति के अपनी गलती को ईमानदारी से स्वीकार करने और उसके लिए प्रायश्चित करने की इच्छा व्यक्त करने पर दया दिखाई जानी चाहिए। पीठ ने कहा, दंड देने की शक्ति में क्षमा करने की शक्ति भी निहित है, बशर्ते अदालत के समक्ष उपस्थित व्यक्ति अपने उस कृत्य के लिए वास्तविक पश्चाताप और खेद व्यक्त करे जिसके कारण वह इस स्थिति में पहुंचा है।
UAPA जैसे कड़े कानूनों के मामलों की धीमी सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट से यह भी कहा कि वे जांचें कि इन मामलों की सुनवाई के लिए कितनी विशेष अदालतें बनाई गई हैं, और यदि पर्याप्त विशेष अदालतें नहीं हैं तो सेशन कोर्ट की संख्या और उनकी क्षमता की समीक्षा की जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पांच साल से ज्यादा पुराने मामलों की रोजाना सुनवाई की जाए और अनावश्यक स्थगन न दिया जाए। साथ ही हाई कोर्ट समय-समय पर इन ट्रायल कोर्ट से प्रगति रिपोर्ट लेकर प्रशासनिक स्तर पर देरी के कारणों को दूर करे। ये निर्देश 2010 में जयनगर-एक्सप्रेस पटरी से उतरने के मामले में आरोपियों की जमानत के खिलाफ CBI की अपील पर सुनवाई के दौरान दिए गए।