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Supreme Court: आपराधिक केस में पुलिसकर्मियों की मीडिया ब्रीफिंग पर व्यापक नियमावली होगी तैयार, MHA को निर्देश

Wed, 13 Sep 2023 03:04 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 13 Sep 2023 03:04 PM IST
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Supreme Court Update DGPs to submit suggestion to MHA preparing manual police media briefing in criminal cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले में मीडिया ट्रायल न्याय प्रशासन और पीड़ितों के साथ-साथ अभियुक्तों के हितों को भी प्रभावित करता है। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस की ओर से मीडिया को दी जाने वाली जानकारी (ब्रीफिंग) के बारे में गृह मंत्रालय व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करे। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए गृह मंत्रालय को तीन महीने का समय दिया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को दिशा-निर्देश के लिए सुझाव देने का भी निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सुझाव पर भी विचार किया जाए।

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पीठ ने पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने की जरूरत पर जोर दिया और कहा, जांच के विवरण किस स्तर पर सामने लाए जा सकते हैं, यह तय करने की जरूरत है। जब तक आरोपी दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक उसके पक्ष में बेगुनाही की धारणा होती है और मीडिया रिपोर्ट से आरोपी की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आनी चाहिए। पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग भी सार्वजनिक संदेह को जन्म देती है। पीठ ने कहा, आपराधिक मामलों की सूचना देने में एकरूपता नहीं हो सकती, क्योंकि कुछ मामलों में पीड़ित और आरोपी दोनों नाबालिग हो सकते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि उनकी निजता प्रभावित न हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार, निष्पक्ष जांच के आरोपी के अधिकार और पीड़ितों की गोपनीयता के बीच नाजुक संतुलन पर जोर दिया गया है। यह मामला दो महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित है। पहला, मुठभेड़ों की स्थिति में पुलिस की ओर से अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं और दूसरा, आपराधिक मामलों की जांच के दौरान मीडिया ब्रीफिंग करते समय पुलिस को क्या प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। पहले मुद्दे को पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र के 2014 के फैसले में सुलझाया जा चुका है और शीर्ष अदालत अब दूसरे मुद्दे पर गौर कर रही है।
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इस मुद्दे में जनहित की कई परतें शामिल
सीजेआई चंद्रचूड़ ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रिपोर्टिंग के मद्देनजर इस मुद्दे के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, इस मामले में जनहित की कई परतें शामिल हैं, जिनमें जांच के दौरान जनता के जानने का अधिकार, जांच प्रक्रिया पर पुलिस के खुलासे का संभावित प्रभाव, आरोपियों के अधिकार और न्याय का प्रशासन शामिल है।
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फंसाने वाली मीडिया रिपोर्टिंग अनुचित
शीर्ष कोर्ट ने कहा, किसी आरोपी को फंसाने वाली मीडिया रिपोर्ट अनुचित है। पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग से जनता में यह संदेह भी पैदा होता है कि उस व्यक्ति ने अपराध किया है। मीडिया रिपोर्ट पीड़ितों की गोपनीयता का भी उल्लंघन कर सकती है।

एक दशक पुराने हैं दिशा-निर्देश 
सुप्रीम कोर्ट ने अपडेटेड दिशा-निर्देशों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। अदालत ने कहा, मौजूदा दिशा-निर्देश एक दशक पहले बनाए गए थे और आपराधिक घटनाओं की मीडिया रिपोर्टिंग तब से काफी विकसित हुई है, जिसमें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में गुजरात में 2002 से 2006 के बीच हुई कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच की मांग करने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई होगी। शीर्ष कोर्ट 2007 में वरिष्ठ पत्रकार बीजी वर्गीस और प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर व शबनम हाशमी द्वारा दायर की गई अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच की मांग की गई है। वहीं वर्गीस की 2014 में मृत्यु हो चुकी है।

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Supreme Court - फोटो : ANI

पार्क में पहुंचे प्रधान न्यायाधीश, बार नेताओं से की बातचीत
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ बुधवार को चार न्यायाधीशों के साथ सुप्रीम कोर्ट परिसर में पुनर्निमित पार्क पहुंचे। यहां उन्होंने बार के नेताओं से मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सचिव रोहित पांडे ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश के साथ ही न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने नवनिर्मित सुस्वागतम सुविधा केंद्र का निरीक्षण भी किया। 'सुस्वागतम' शीर्ष अदालत की एक पहल है जिससे यहां आने वाले लोगों को बिना किसी कठिनाई के कोर्ट परिसर में जाने के लिए आवश्यक ई-पास हासिल करने में मदद मिलती है।

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