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मुजफ्फरनगर दंगे: यूपी सरकार ने 77 मामले बिना कारण बताए वापस लिए, सुप्रीम कोर्ट में दी गई जानकारी
Tue, 24 Aug 2021 10:24 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 24 Aug 2021 10:24 PM IST
सार
साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर दर्ज कए गए 77 मामले उत्तर प्रदेश सरकार ने बिना कोई कारण बताए वापस ले लिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित 77 मामले वापस ले लिए हैं। ये मामले आजीवन कारावास की सजा से संबंधित थे और यूपी सरकार की ओर सेइन्हें वापस लेने का कारण नहीं बताया गया है। यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को इस मामले में सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों का जल्द निपटारा किए जाने का आग्रह करने से संबंधित मामले में अदालत मित्र के रूप में नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने दी।
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विजय हंसारिया ने अधिवक्ता स्नेहा कालिता ओर से दायर अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित कुल 510 मामलों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है। ये मामले मेरठ जोन के पांच जिलों में 6869 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा, इन 510 मामलों में से 175 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है, 165 मामलों में अंतिम रिपोर्ट जमा की गई है और 170 मामलों को खारिज कर दिया गया है।
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इसके बाद राज्य सरकार ने सीआरपीसी की धारा 321 के तहत 77 मामलों को वापस ले लिया। इस संबंध में जारी किए गए सरकारी आदेश में मामले वापस लेने का कोई कारण नहीं बताया गया है। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ व सूर्यकांत की पीठ बुधवार को अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगी जिसमें सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग की गई है।
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