राफेल डील मामले पर किसी नई याचिका की सुनवाई से सर्वोच्च न्यायालय का इनकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राफेल लड़ाकू विमान सौदे मामले पर सर्वोच्च न्यायालय ने किसी भी तरह की नई सुनवाई से इनकार कर दिया है। राफेल मामले पर लगाई गई नई याचिका को खारिज करते हुए सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हम इस मामले पर पहले से ही कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं। फिर इस नई याचिका की क्या जरूरत है। तीन जजों की पीठ इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही है।
बता दें कि 31 अक्तूबर को ही इस मामले में अगली सुनवाई होनी है। राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे पर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म बना हुआ है। कांग्रेस इस मामले पर लगातार मोदी सरकार पर हमलावर बनी हुई है और पूरे सौदे में बड़े भ्रष्टाचार और घोटाले का आरोप लगा रही है। जबकि सरकार इसे वायुसेना की क्षमता बढ़ाने वाला राष्ट्रहित में किया गया सौदा बता रही है।
Supreme Court today refused to hear a fresh petition in connection with #Rafale deal. A three judge Bench of the SC headed by Chief Justice of India Ranjan Gogoi said, "we are already hearing many petitions in the issue". SC asked, "what is the need to hear fresh petition?" pic.twitter.com/U9Jpl6sdkQ
विज्ञापन विज्ञापन
— ANI (@ANI) October 29, 2018
बीते शुक्रवार (27 अक्तूबर) को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने केंद्र से निर्णय लेने की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी थी। बेंच ने सरकार से सौदे की तकनीकी जानकारी और राफेल के कीमतों के बिना यह पूरी रिपोर्ट मांगी थी। मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से निर्णय प्रक्रिया की जानकारी सील बंद लिफाफे में मांगी थी।
अदालत ने पिछली सुनवाई में कहा था कि वह डिफेंस फोर्सेज के लिए राफेल विमानों की उपयुक्तता पर कोई राय नहीं देना चाहती है और न ही कोई नोटिस जारी कर रही है। अदालत सिर्फ फैसला लेने की प्रक्रिया की वैधता जानना चाहती है।
इस सौदे का विरोध कर रही मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का कहना है कि सरकार 1670 करोड़ रुपये प्रति राफेल की दर से विमान खरीद रही है जबकि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान इसकी कीमत 526 करोड़ रुपये तय हुई थी।