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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court to pronounce verdict tomorrow on review petition against Navjot Singh Sidhu in road rage case

Navjot Singh Sidhu: रोड रेज मामले में पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला, पीड़ित परिवार ने की है सजा बढ़ाने की मांग

Wed, 18 May 2022 11:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 18 May 2022 11:11 PM IST
सार

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये मामला 33 साल पुराना है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ही दोषसिद्धि पर रोक लगाई थी।

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Supreme Court to pronounce verdict tomorrow on review petition against Navjot Singh Sidhu in road rage case
नवजोत सिंह सिद्धू। - फोटो : फाइल

विस्तार

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ तीन दशक पुराने रोड रेज मामले में पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल 19 मई को फैसला सुनाएगा। इस मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर  सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि कांग्रेस नेता की सजा बढ़ाई जाए या नहीं। 

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कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये मामला 33 साल पुराना है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ही दोषसिद्धि पर रोक लगाई थी। गौरतलब है कि इसी वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने 33 साल पुराने रोड रेज केस में सिद्धू की सजा बढ़ाने की पीड़ित परिवार की पुनर्विचार याचिका पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। 
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बता दें कि पीड़ित परिवार की इस याचिका में मामले में नोटिस के दायरे को बढ़ाने की मांग की गई है। सिद्धू का 1988 में पटियाला में पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें एक बुजुर्ग गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। आरोप है कि सिद्धू और गुरनाम सिंह के बीच बीच हाथापाई भी हुई थी। पुलिस ने इस घटना में नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह सिद्धू के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। 
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इस मामले में हाईकोर्ट ने सिद्धू को दोषी ठहराया था और तीन साल जेल व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सिद्धू सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे जहां उन्हें बरी कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 1000 रुपये का जुर्माना लगाकर उन्हें बरी कर दिया था। पीड़ित पक्ष ने इसे लेकर पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

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