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सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों से कहा, इस तरह जमानत देना तुरंत बंद करें

Sun, 13 Aug 2017 02:00 PM IST
एजेंसी, भाषा
एजेंसी, भाषा Updated Sun, 13 Aug 2017 02:00 PM IST
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Supreme Court to Lower courts, Don't grant bail if higher courts gives pre-arrest relief
सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों से कहा कि जो मामले ऊपरी अदालतों में लंबित हैं उनमें वह नियमित जमानत देने की परिपाटी को तुरंत बंद कर दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी को ऊपरी अदालत ने पहले ही अग्रिम जमानत दी हुई है और मामला वहां लंबित है तो आरोपी निचली अदालत में सरेंडर नहीं कर सकता और उससे जमानत नहीं मांग सकता।

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कोर्ट ने कहा, देश में आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाले सभी न्यायिक अधिकारियों के संज्ञान में यह बात लाने के लिए, सभी न्यायिक अकादमियों के निदेशकों को उसके आदेश की प्रतियां भेजी जाएं।
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सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में ली एक घटना

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने एक घटना को संज्ञान में लिया जिसमें झारखंड में एक निचली अदालत ने उस आरोपी को जमानत दे दी थी,  जिसे सुप्रीम कोर्ट से पहले ही अग्रिम जमानत मिल गई थी। कोर्ट में उसके मामले की सुनवाई चल रही है और उसे अंतरिम राहत दी गई।

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पीठ ने कहा, ‘‘देश में निचली कोर्टों में ऐसी परिपाटी चल रही है और हमने कई ऐसे मामले देखे हैं तो अब वक्त आ गया है कि निचली कोर्टों को यह बताया जाए कि ऐसी परिपाटी बंद हो और अगर ऊपरी कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लंबित है तो निचली कोर्ट में जमानत अर्जी पर विचार ना किया जाए।’’

निचली अदालत द्वारा जमानत दिए जाने को चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की एक याचिका पर यह आदेश दिया जिसमें सरकारी वकील अतुलेश कुमार ने निचली अदालत द्वारा जमानत दिए जाने को चुनौती दी है।

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