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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court to consider listing for early hearing PIL for speedy trial in cases against politicians

दिल्ली: क्या दागी नेताओं के खिलाफ मामलों में तेजी से होगी सुनवाई? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

Wed, 09 Feb 2022 02:00 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 09 Feb 2022 02:00 PM IST
सार

इस जनहित याचिका में सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई और सीबीआई एवं अन्य एजेंसियों द्वारा त्वरित जांच की मांग की गई है।

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Supreme Court to consider listing for early hearing PIL for speedy trial in cases against politicians
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को उस जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई और सीबीआई एवं अन्य एजेंसियों द्वारा त्वरित जांच की मांग की गई है।

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याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की जरूरत: चीफ जस्टिस 
प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र विजय हंसरिया की इस दलील पर गौर किया कि याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की जरूरत है। हंसारिया ने कहा कि मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों और एमएलसी के खिलाफ लंबित मामलों का विवरण देने वाली एक नई रिपोर्ट अदालत में दायर की गई है और लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निपटान के लिए तत्काल, कड़े कदमों की आवश्यकता की माग की गई है। हंसारिया ने कहा कि हमलोग इसपर विचार करेंगे और जल्द निर्णय देंगे।
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दागी नेताओं के खिलाफ 4,984 मामले लंबित
हाल की रिपोर्ट के अनुसार, संसद सदस्यों और विधान सभा/परिषद के सदस्यों के खिलाफ कुल 4,984 मामले लंबित हैं, जिनमें से 1,899 मामले पांच साल से अधिक पुराने हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2018 तक लंबित मामलों की कुल संख्या 4,110 थी और अक्तूबर 2020 तक यह 4,859 था।
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अधिवक्ता स्नेहा कलिता ने की त्वरित निपटान की मांग
4 दिसंबर 2018 के बाद 2775 मामलों के निपटारे के बाद भी सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामले 4,122 से बढ़कर 4,984 हो गए हैं। इससे पता चलता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अधिक से अधिक लोग संसद और राज्य विधानसभाओं में सीटों पर कब्जा कर रहे हैं। अधिवक्ता स्नेहा कलिता के माध्यम से दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निपटान के लिए तत्काल और कड़े कदम उठाने की अत्यधिक आवश्यकता है।

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