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SC: 'छह महीने के जुड़वां बच्चों को मां से अलग करना सबसे बड़ी क्रूरता', सुप्रीम कोर्ट ने पति को लगाई फटकार

Thu, 19 Feb 2026 08:18 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 19 Feb 2026 08:18 PM IST
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Supreme Court terms twin infants separation from mother cruelty of highest order in matrimonial dispute case
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वैवाहिक विवाद में अलग हुए पति द्वारा छह महीने की उम्र में जुड़वां बच्चों को उनकी मां से अलग करने के मामले को 'सर्वोच्च क्रूरता' का मामला करार दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की पीठ ने डेढ़ साल के बच्चों को मां से अलग करने के लिए पति को फटकार लगाई।
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सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अलग रह रहे पति-पत्नी को अगली सुनवाई की तारीख पर अपने बच्चों के साथ न्यायाधीशों के समक्ष कक्ष में उपस्थित होने का आदेश दिया। पीठ ने टिप्पणी की, 'पति ने महज छह महीने के बच्चों को उनकी मां से अलग करके घोर क्रूरता की है। बच्चों की भलाई सबसे पहले है। यह न्याय का घोर अपमान है।'
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छह महीने के बच्चों को मां से अलग नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छह महीने के छोटे बच्चों को उनकी मां से अलग नहीं किया जा सकता। यह घोर क्रूरता है। सुप्रीम कोर्ट अलग रह रहे पति की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें पत्नी की ओर से लखनऊ में शुरू किए गए वैवाहिक मामलों को पंजाब में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
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पति के वकील ने कहा कि अदालत को जुड़वां बच्चों के संबंध में यथास्थिति को नहीं बदलना चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए हानिकारक होगा। पीठ ने वकील से कहा कि कोई भी दाई या दादी छह महीने के बच्चों की देखभाल वैसे नहीं कर सकती जैसे मां कर सकती है।

पति बोला- खुद ही बच्चों को छोड़ गई
पति के वकील ने दावा किया कि वह स्वयं वैवाहिक घर छोड़कर चली गई थी और बच्चों को अपने पास रखने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। पीठ ने वकील से कहा कि अगर उन्हें अपने जुड़वां बच्चों (लड़का और लड़की) की कस्टडी रखने में दिलचस्पी नहीं होती, तो वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक नहीं लड़तीं।

न्यायमूर्ति मेहता ने टिप्पणी की, “उसे दरअसल उसके बच्चों के बिना ही उसके ससुराल से निकाल दिया गया था। उसके बच्चों को उससे अलग करके उसकी पिटाई की गई और उस पर अत्यधिक क्रूरता की गई।” महिला के वकील ने बताया कि पति शराबी था और वीडियो कॉल पर भी बच्चों को दिखाने को तैयार नहीं था।


सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
पति के वकील ने कहा कि महिला ने लखनऊ में कई मामले दर्ज कराए हैं और वह उन्हें स्थानांतरित करने की मांग कर रहा है। पीठ ने गौर किया कि महिला एक शिक्षिका थी और पति एक व्यवसायी था और उससे पूछा कि वह अपनी अलग रह रही पत्नी को कितना भरण-पोषण दे रहा है और कितना देने को तैयार है। पीठ ने आदेश दिया कि अगली तारीख यानी 26 फरवरी को आप दोनों बच्चों के साथ अदालत के कक्ष में उपस्थित हों।

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