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ट्रॉमा इलाज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा-हर घायल को तुरंत इलाज देना मौलिक अधिकार, एम्बुलेंस पर क्या निर्देश दिए?

Thu, 28 May 2026 05:52 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 28 May 2026 05:52 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सड़क हादसे या गंभीर दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत ट्रॉमा इलाज मिलना जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी सेवाओं को 112 हेल्पलाइन से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-कुछ कहा...

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Supreme Court  Stricts Trauma Care Declares Immediate Treatment for Injured Person Fundamental Right
हादसों में देरी से इलाज पर अदालत सख्त - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश में सड़क हादसों और गंभीर दुर्घटनाओं में हर साल हजारों लोगों की मौत इलाज में देरी के कारण हो जाती है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि किसी भी घायल व्यक्ति को तुरंत ट्रॉमा इलाज मिलना उसके जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने साफ कहा कि हादसे के बाद का हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है और इलाज में थोड़ी भी देरी किसी की जान ले सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया है कि देशभर में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत किया जाए और लोगों तक समय पर मदद पहुंचाने की एक समान व्यवस्था बनाई जाए।
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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने मंगलवार को कई अहम अंतरिम आदेश जारी किए। अदालत ने कहा कि सड़क हादसों और अन्य आपात स्थितियों में लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी और एम्बुलेंस हेल्पलाइन को 112 नंबर से जोड़ें। अदालत ने कहा कि अलग-अलग हेल्पलाइन होने से लोगों में भ्रम की स्थिति बनती है। एकीकृत व्यवस्था से राहत और बचाव कार्य तेज होगा। अदालत ने 112 हेल्पलाइन के प्रचार-प्रसार के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं।
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क्यों जरूरी मानी गई एकीकृत इमरजेंसी व्यवस्था?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हादसों में सबसे बड़ी समस्या समय पर मदद न मिलना है। कई बार लोग यह नहीं समझ पाते कि किस नंबर पर फोन करें। अदालत का मानना है कि अगर पुलिस, एम्बुलेंस और दूसरी आपात सेवाएं एक प्लेटफॉर्म पर जुड़ जाएंगी तो राहत कार्य तेजी से होगा। अदालत ने यह भी कहा कि राज्यों को शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी, ताकि किसी भी लापरवाही की तुरंत जांच हो सके। राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे ट्रॉमा मामलों की निगरानी बेहतर हो सकेगी।

एम्बुलेंस व्यवस्था को लेकर क्या निर्देश दिए गए?
सुप्रीम कोर्ट ने एम्बुलेंस सेवाओं की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि सभी सरकारी और निजी एम्बुलेंस को तय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए। इनमें जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी लोकेशन तुरंत पता चल सके। अदालत ने कहा कि एम्बुलेंस को 112 हेल्पलाइन से जोड़ा जाए, जिससे कॉल मिलते ही सबसे नजदीकी एम्बुलेंस मौके पर पहुंच सके। अदालत ने नियमित जांच और निगरानी की भी व्यवस्था करने को कहा है, ताकि नियमों का सही पालन हो सके।


ट्रॉमा रजिस्ट्री बनाने का क्या होगा फायदा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय को आठ सप्ताह के भीतर ट्रॉमा रजिस्ट्री के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया है। इसके बाद राज्यों को चार महीने के भीतर अपनी ट्रॉमा रजिस्ट्री तैयार करनी होगी। ट्रॉमा रजिस्ट्री में हादसों, घायलों, इलाज और मौतों से जुड़े आंकड़े दर्ज किए जाएंगे। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में ज्यादा हादसे हो रहे हैं और कहां स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी और हादसों में होने वाली मौतों को कम किया जा सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा। सड़क हादसे, औद्योगिक दुर्घटना या किसी भी आपात स्थिति में अब तेजी से चिकित्सा मदद मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि लोगों की जान बचाना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अगर राज्यों ने तय समय में व्यवस्थाएं मजबूत कर लीं तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ट्रॉमा केयर सिस्टम लंबे समय से बिखरा हुआ था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद देश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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