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Supreme Court: जेलों में भीड़भाड़ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा ताजा डाटा
Sat, 21 Mar 2026 11:20 PM IST
Nirmal Kant
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटक।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटक।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:20 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने देश की जेलों में बढ़ती भीड़ पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें प्रत्येक जेल की क्षमता, कैदियों की संख्या, भीड़भाड़ का प्रतिशत और महिलाओं व उनके बच्चों के लिए सुविधाओं का विवरण शामिल होगा। पढ़िए रिपोर्ट-
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
देशभर की जेलों में बढ़ती भीड़भाड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी जेलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। यह आदेश जेलों में भीड़भाड़ से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में न्यायमित्र नियुक्त वकील गौरव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के पास राज्यवार जेलों की ताजा स्थिति से जुड़ा कोई अपडेट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जेलों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें हर जेल की क्षमता, वहां बंद कैदियों की कुल संख्या (विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों), तथा प्रत्येक जेल में भीड़भाड़ का प्रतिशत शामिल होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों की जानकारी भी मांगी है।
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अदालत ने महिलाओं की जेलों पर विशेष ध्यान देते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं का ब्योरा भी मांगा है, जिसमें महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा, चिकित्सा और देखभाल की व्यवस्थाएं शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जेल प्रशासन में स्वीकृत पदों की संख्या, वर्तमान रिक्तियां और उन्हें भरने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी हलफनामे में दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये सभी हलफनामे संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिव की ओर से दाखिल किए जाएं। इसके लिए अंतिम तारीख 18 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में न्यायमित्र नियुक्त वकील गौरव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के पास राज्यवार जेलों की ताजा स्थिति से जुड़ा कोई अपडेट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जेलों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें हर जेल की क्षमता, वहां बंद कैदियों की कुल संख्या (विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों), तथा प्रत्येक जेल में भीड़भाड़ का प्रतिशत शामिल होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों की जानकारी भी मांगी है।
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अदालत ने महिलाओं की जेलों पर विशेष ध्यान देते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं का ब्योरा भी मांगा है, जिसमें महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा, चिकित्सा और देखभाल की व्यवस्थाएं शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जेल प्रशासन में स्वीकृत पदों की संख्या, वर्तमान रिक्तियां और उन्हें भरने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी हलफनामे में दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये सभी हलफनामे संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिव की ओर से दाखिल किए जाएं। इसके लिए अंतिम तारीख 18 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।
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