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पश्चिम बंगाल सरकार के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली निवासी को भेजे समन, अदालत ने लगाई रोक
Thu, 29 Oct 2020 04:44 PM IST
दीप्ति मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Thu, 29 Oct 2020 04:44 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
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दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने पश्चिम बंगाल सरकार के बारे में फेसबुक पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट की थी। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को दिल्ली निवासी व्यक्ति को जांच अधिकारी द्वारा वहां तलब किए जाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
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न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि अदालतों को पुलिस जांच के मामले में न्यायिक समीक्षा करते समय संयम बरतना चाहिए। पीठ ने कहा कि अदालत को संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(ए) में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की अवश्य रक्षा करनी चाहिए।
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पीठ ने कहा, ''यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए में प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल लोगों को डराने, धमकाने और परेशान करने के लिए नहीं हो। हमारी यह सुविचारित राय है कि इस मामले में सामने आए तथ्यों के मद्देनजर याचिकाकर्ता के लिए इस समय उच्च न्यायालय में कार्यवाही लंबित होने के दौरान धारा 41ए के तहत भेजे गये सम्मन का अनुपालन करने की जरूरत नहीं है। अत: हम याचिकाकर्ता को बालीगंज थाने में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने संबंधी उच्च न्यायालय के निर्देश के अमल पर अंतरिम रोक लगाते हैं।''
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सभी सवालों के जवाब देने की शर्त पर राहत
न्यायालय ने कहा, यह राहत इस शर्त के साथ है कि याचिकाकर्ता जांच अधिकारी द्वारा उसके पास भेजे गए सवालों के जवाब देने का आश्वासन देगी और अगर जरूरी हुआ, तो 24 घंटे के पूर्व नोटिस पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये इनका जवाब देगी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि उनकी मुवक्किल हर तरह से सहयोग करेगी। हालांकि, पांच जून, 2020 के बाद से पांच महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई सवाल नहीं किए गए हैं।
24 घंटे पहले नोटिस देना होगा
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने कहा कि जांच अधिकारी को अगर आवश्यक हो, तो कथित फेसबुक पोस्ट के संबंध में याचिकाकर्ता से कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए दिल्ली आने की छूट प्रदान की जाए। शीर्ष अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि इस बारे में 24 घंटे का पूर्व नोटिस दिए जाने पर याचिकाकर्ता के वकील को कोई आपत्ति नहीं है और इसी के साथ पश्चिम बंगाल सरकार का यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।
क्या था मामला
बता दें कि याचिकाकर्ता को बालीगंज थाने के जांच अधिकारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए के तहत सम्मन जारी किए थे। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में स्पष्ट रूप से दो पोस्ट का हवाला दिया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राजाबाजार में लॉकडाउन का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इस दौरान हजारों लोग एक साथ निकले हैं और इससे सवाल उठ रहा है कि क्या राज्य प्रशासन इस संबंध में कुछ करेगा।
उच्चतम न्यायालय दिल्ली निवासी रोहिणी बिश्वास की अपील पर सुनवाई कर रहा था। बिश्वास ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें बालीगंज थाने के जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था।