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Supreme Court: सिनेमाघरों में बाहरी खाना-पीना ले जाने पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- थिएटर कोई जिम नहीं

Tue, 03 Jan 2023 09:34 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 03 Jan 2023 09:34 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर सिनेमा हॉल ऑनर्स एसोसिएशन की ओर से याचिका दाखिल की गई है। इसमें जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मामले की सुनवाई की।

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Supreme Court stays Jammu and Kashmir High Court order on taking outside food to cinema halls
सिनेमाघर - फोटो : अमर उजाला मुंबई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा हॉल के अंदर खाने-पीने की चीजों की बिक्री को लेकर अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने सिनेमाघरों में बाहर से खाने-पीने की चीजों को ले जाने की इजाजत देने के जम्मू हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सिनेमा हॉल के अंदर खाने-पीने की चीजों की बिक्री के लिए नियम और शर्तें तय करने के लिए हॉल प्रबंधन पूरी तरह से हकदार हैं। एक फिल्म देखने वाले के पास सिनेमाघरों के अंदर उपलब्ध खाद्य और पेय पदार्थों को खरीदने या नहीं खरीदने का विकल्प होता है।

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शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा सिनेमा हॉल जिम नहीं है, जहां आपको पौष्टिक भोजन चाहिए। वह मनोरंजन की जगह है। सिनेमा हॉल प्रबंधन की निजी संपत्ति है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में हाईकोर्ट ने बाहरी खाना-पीना हॉल में ले जाने की इजाजत दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द करते हुए कहा कि इस आदेश को सुनाते हुए हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।
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सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर सिनेमा हॉल ऑनर्स एसोसिएशन की ओर से याचिका दाखिल की गई है। इसमें जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर कोई दर्शक सिनेमा हॉल में प्रवेश करता है तो उसे सिनेमा हॉल के मालिक के नियमों का पालन करना पड़ता है और यह स्पष्ट रूप से थिएटर मालिक के व्यावसायिक निर्णय का मामला है। सिनेमा हॉल मालिकों की दलील थी कि पीने के पानी की आपूर्ति नि: शुल्क की जाएगी और जब एक शिशु माता-पिता के साथ जाता है, तो ऐसे मामले में हॉल के मालिक शिशु के लिए उचित मात्रा में भोजन ले जाने पर आपत्ति नहीं करते हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट थिएटर मालिकों और मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि जम्मू और कश्मीर द्वारा बनाए गए नियमों में फिल्म देखने वालों को हॉल के अंदर अपना भोजन या पानी की बोतल ले जाने पर रोक नहीं है, दर्शकों को बाहर से खाने पीने की चीजों को हॉल में ले जाने की अनुमति दे दी थी।

‘बोली आमंत्रित करना’ आवंटन का सबसे पारदर्शी व गैर-मनमाना तरीका : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, ‘बोली आमंत्रित करना’ आवंटन का सबसे पारदर्शी और गैर-मनमाना तरीका है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह आपूर्तिकर्ताओं को नामांकित करने के बजाय निविदाएं आमंत्रित करके आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद करे। शीर्ष अदालत ने विभिन्न फैसलों का जिक्र करते हुए कहा, सरकार जनता के साथ व्यवहार करते समय मनमानी नहीं कर सकती, चाहे वह नौकरी दे रही हो या अनुबंध कर रही हो। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने पीएसयू इंडियन मेडिसिंस फार्मास्युटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड की याचिका को खारिज कर दिया। इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुुनौती दी गई थी जिसमें कहा गया था कि राज्य बिना निविदा आमंत्रित किए पीएसयू से आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद नहीं कर सकता। पीठ ने कहा, हमारे सामने रखी गई परिस्थितियों में संस्थाओं से निविदाएं आमंत्रित करना... आवंटन का सबसे पारदर्शी और गैर-मनमाना तरीका है। इसलिए, अपीलकर्ता को निविदाओं जैसी मुक्त व पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से ही आयुर्वेदिक दवाएं खरीदनी चाहिए। पीठ ने कहा, अपीलकर्ता इस नियम से हटकर सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही नामांकन के जरिये दवाओं की खरीद कर सकता है।   



 

सिख विरोधी दंगा : कांग्रेस के पूर्व पार्षद की जमानत याचिका पर सीबीआई से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर की जमानत याचिका पर मंगलवार को सीबीआई से जवाब मांगा। खोखर ने लगभग नौ साल जेल में गुजारने समेत विभिन्न आधार पर जमानत का अनुरोध किया है। खोखर के अलावा, कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार और पूर्व विधायक महेंद्र यादव इसी मामले में क्रमशः आजीवन कारावास और 10 साल की जेल की सजा काट रहे हैं। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने इस दलील पर गौर किया कि खोखर 50 फीसदी दिव्यांग होने के अलावा मामले में अब तक आठ साल 10 महीने जेल की सजा काट चुका है। पीठ ने कहा, नोटिस जारी किया जाए। चार सप्ताह बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा। अदालत ने इस बीच सीबीआई को अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। इससे पूर्व मई 2020 में शीर्ष अदालत ने कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत या पैरोल देने से इन्कार कर दिया था। सज्जन कुमार और बलवान खोखर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 17 दिसंबर, 2018 को मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से तिहाड़ जेल में बंद हैं। 
 
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