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IIT-JEE काउंसिलिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, हाईकोर्ट को भी मामले से दूर रहने के निर्देश
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Fri, 07 Jul 2017 08:14 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी-जेईई की काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को भी निर्देश दिए हैं कि आईआईटी-जेईई से जुड़े किसी भी याचिका को कोर्ट न तो स्वीकारे, और न ही उसपर सुनवाई करे।
JEE: सरकार और IIT मद्रास को नोटिस, SC ने पूछा सभी छात्रों को क्यों दिए बोनस अंक
सुप्रीम कोर्ट ने एक्स्ट्रा मार्क्स के साथ काउंसिलिंग और एडमिशन पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिसरा और ए एम खानविलकर की बेंच ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।
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जस्टिस दीपक मिसरा और ए एम खानविलकर की बेंच ने देश के सभी हाईकोर्ट को भी निर्देश दिए हैं, कि वो आईआईटी-जेईई के काउंसिलिंग और एडमिशम से जुड़ी किसी भी याचिका की सुनवाई न करे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश तुरंत प्रभाव से प्रभावी हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टॉपर लिस्ट पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं को भी तलब की है, जिनपर हाईकोर्ट में मामले चल रहे हैं।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और आईआईटी मद्रास से पूछा था कि आईआईटी-जेईई परीक्षा में उन छात्रों को बोनस अंक क्यों दिए गए, जिन्होंने ‘गलत प्रश्नों’ को हल करने का प्रयास ही नहीं किया। इस बार प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास को दी गई थी।
न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय और आईआईटी मद्रास से पूछा है कि प्रवेश परीक्षा में ऐसे छात्रों को बोनस अंक क्यों दिए गए, जिन्होंने गलत छपे प्रश्नों को हल करने का प्रयास ही नहीं किया। दोनों को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला आया है।
गौरतलब है कि छात्रा ने आईआईटी-जेईई परीक्षा में ग्रेस मार्क्स देने को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि परीक्षा में शामिल सभी छात्रों को गलत प्रश्नों के एवज में बोनस अंक दिए गए। इसमें गलत प्रश्नों के एवज में आईआईटी मद्रास ने सभी छात्रों को 18 अंक दिए थे।
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JEE: सरकार और IIT मद्रास को नोटिस, SC ने पूछा सभी छात्रों को क्यों दिए बोनस अंक
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सुप्रीम कोर्ट ने एक्स्ट्रा मार्क्स के साथ काउंसिलिंग और एडमिशन पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिसरा और ए एम खानविलकर की बेंच ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।
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#FLASH Supreme Court stays the counseling of IIT-JEE across the country.
— ANI (@ANI_news) July 7, 2017
जस्टिस दीपक मिसरा और ए एम खानविलकर की बेंच ने देश के सभी हाईकोर्ट को भी निर्देश दिए हैं, कि वो आईआईटी-जेईई के काउंसिलिंग और एडमिशम से जुड़ी किसी भी याचिका की सुनवाई न करे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश तुरंत प्रभाव से प्रभावी हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टॉपर लिस्ट पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं को भी तलब की है, जिनपर हाईकोर्ट में मामले चल रहे हैं।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और आईआईटी मद्रास से पूछा था कि आईआईटी-जेईई परीक्षा में उन छात्रों को बोनस अंक क्यों दिए गए, जिन्होंने ‘गलत प्रश्नों’ को हल करने का प्रयास ही नहीं किया। इस बार प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास को दी गई थी।
न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय और आईआईटी मद्रास से पूछा है कि प्रवेश परीक्षा में ऐसे छात्रों को बोनस अंक क्यों दिए गए, जिन्होंने गलत छपे प्रश्नों को हल करने का प्रयास ही नहीं किया। दोनों को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला आया है।
गौरतलब है कि छात्रा ने आईआईटी-जेईई परीक्षा में ग्रेस मार्क्स देने को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि परीक्षा में शामिल सभी छात्रों को गलत प्रश्नों के एवज में बोनस अंक दिए गए। इसमें गलत प्रश्नों के एवज में आईआईटी मद्रास ने सभी छात्रों को 18 अंक दिए थे।