{"_id":"685ba62fa3af8fb0a30557bb","slug":"supreme-court-slams-up-jail-authorities-for-delay-in-releasing-accused-on-bail-orders-5-lakh-compensation-2025-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: जमानत के बावजूद नहीं हुई आरोपी की रिहाई, यूपी सरकार को पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: जमानत के बावजूद नहीं हुई आरोपी की रिहाई, यूपी सरकार को पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश
Wed, 25 Jun 2025 01:18 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 25 Jun 2025 01:18 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि आरोपी को मंगलवार को जेल से रिहा कर दिया गया और इस बात की जांच की जा रही है कि आरोपी की रिहाई में देरी क्यों हुई।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश जेल प्राधिकरण को फटकार लगाई और जमानत के बावजूद आरोपी की रिहाई न होने पर नाराजगी जाहिर की। आरोपी को बीती 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। आरोपी के खिलाफ धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे आरोपी को हर्जाने के तौर पर पांच लाख रुपये दें। आरोपी को बीती 24 जून को गाजियाबाद की जेल से रिहा कर दिया गया। उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन के निदेशक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पेश हुए। पीठ ने नाराज होते हुए पूछा कि 'आपके अधिकारियों की संवेदनशीलता पर आपका क्या कहना है?' पीठ ने कहा कि अधिकारियों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले नागरिक अधिकारों की अहमियत के बारे में संवेदनशील बनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'आजादी बेहद ही कीमती और अहम अधिकार है, जिसकी गारंटी हमारा संविधान देता है।'
ये भी पढ़ें- Emergency: 'किस तरह संविधान की भावना का उल्लंघन किया गया? कोई भी भारतीय कभी नहीं भूलेगा'; आपातकाल पर पीएम
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि आरोपी को मंगलवार को जेल से रिहा कर दिया गया और इस बात की जांच की जा रही है कि आरोपी की रिहाई में देरी क्यों हुई। इस पर अदालत ने कहा कि इसकी जांच गाजियाबाद के मुख्य जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के बाद रिपोर्ट पेश करने को भी कहा। आरोपी ने दावा किया कि उसे धर्मांतरण विरोधी कानून की एक उपधारा के चलते रिहा नहीं किया गया क्योंकि जमानत आदेश में इसका जिक्र नहीं था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे आरोपी को हर्जाने के तौर पर पांच लाख रुपये दें। आरोपी को बीती 24 जून को गाजियाबाद की जेल से रिहा कर दिया गया। उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन के निदेशक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पेश हुए। पीठ ने नाराज होते हुए पूछा कि 'आपके अधिकारियों की संवेदनशीलता पर आपका क्या कहना है?' पीठ ने कहा कि अधिकारियों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले नागरिक अधिकारों की अहमियत के बारे में संवेदनशील बनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'आजादी बेहद ही कीमती और अहम अधिकार है, जिसकी गारंटी हमारा संविधान देता है।'
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Emergency: 'किस तरह संविधान की भावना का उल्लंघन किया गया? कोई भी भारतीय कभी नहीं भूलेगा'; आपातकाल पर पीएम
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि आरोपी को मंगलवार को जेल से रिहा कर दिया गया और इस बात की जांच की जा रही है कि आरोपी की रिहाई में देरी क्यों हुई। इस पर अदालत ने कहा कि इसकी जांच गाजियाबाद के मुख्य जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के बाद रिपोर्ट पेश करने को भी कहा। आरोपी ने दावा किया कि उसे धर्मांतरण विरोधी कानून की एक उपधारा के चलते रिहा नहीं किया गया क्योंकि जमानत आदेश में इसका जिक्र नहीं था।