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Supreme Court: शीर्ष कोर्ट ने हटाई खेल कोटे के तहत प्रवेश के लिए शर्तें; कहा- 75 फीसदी अंक की अनिवार्यता गलत
Thu, 10 Aug 2023 10:24 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 10 Aug 2023 10:24 PM IST
सार
जस्टिस एस रवींद्र भट्ट और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ देव गुप्ता और अन्य की अपील को स्वीकार कर लिया। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के पीईसी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 2 फीसदी खेल कोटा के तहत इंजीनियरिंग कोर्स में प्रवेश के लिए पात्रता शर्त (अर्हता परीक्षा में) के रूप में न्यूनतम 75 फीसदी अंक रखने के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने खेल कोटे के जरिए प्रवेश लेने वाले खिलाड़ियों के लिए 75 फीसदी अंक की अनिवार्यता को अनुचित माना है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि खेल कोटा का उद्देश्य योग्यता को समायोजित करना नहीं है। इसका उद्देश्य संस्थान, विश्वविद्यालय और आखिर में देश में खेलों को बढ़ावा देना है न कि अकादमिक योग्यता को समायोजित करना। शीर्ष अदालत ने इंजीनियरिंग कोर्स के लिए योग्यता परीक्षा में 75 फीसदी से कम अंक हासिल करने की पात्रता मानदंड को अनुचित और भेदभावपूर्ण करार दिया।
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जस्टिस एस रवींद्र भट्ट और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ देव गुप्ता और अन्य की अपील को स्वीकार कर लिया। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के पीईसी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 2 फीसदी खेल कोटा के तहत इंजीनियरिंग कोर्स में प्रवेश के लिए पात्रता शर्त (अर्हता परीक्षा में) के रूप में न्यूनतम 75 फीसदी अंक रखने के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी। पीठ ने आदेश में कहा, न्यूनतम 75 फीसदी पात्रता शर्त लागू करना खेल कोटा शुरू करने के उद्देश्य को पूरा नहीं करता है बल्कि इसके लिए विनाशकारी है। यह भेदभावपूर्ण है। यह समानता का उल्लंघन करता है।
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इस दौरान पीठ ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय खिलाड़ियों के लिए ‘नर्सरी’ होते हैं। यहां से उन्हें राज्य, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर और ओलंपिक खेलों में प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य या शैक्षणिक संस्थान न्यूनतम पात्रता शर्त पर जोर दे सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसी शर्त अनिवार्य रूप से वही होगी जो सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों पर लागू होती है।
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पीठ ने यह भी कहा कि 75 फीसदी अंक की अनिवार्य शर्त से ऐसा भी हो सकता है कि एक खिलाड़ी जिसने ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया हो, कुश्ती में एक या दो पदक जीते हों उसे दाखिला न मिले। लेकिन ऐसे पहलवान, जिन्होंने योग्यता परीक्षा में 80 अंक हासिल की लेकिन वे कभी भी राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंचे उन्हें मौका मिल सकता है। यह एक समान मानदंड का ‘असमान अनुप्रयोग’ है। यह अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) के खिलाफ है।