बिना अनुमति सीमा पार करने वाले बर्खास्त सीआरपीएफ जवान की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस
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बिना पूर्व अनुमति भारत-नेपाल सीमा पार करने पर नौकरी से बर्खास्त हुए सीआरपीएफ के एक जवान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीआरपीएफ को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। जवान ने दावा किया कि माओवादियों के चंगुल में फंसे अपने एक साथी की जान बचाने के लिए वह भारत-नेपाल सीमा के उस पार गया था।
अपनी याचिका में जम्मू निवासी केवल कृष्ण ने कहा कि यह आरोप बेबुनियाद है कि शराब के नशे में वह सीमा पार गया और वहां से गोलियां चलाई। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा, ‘कृष्ण माओवादियों के चंगुल में फंसे अपने साथी नारायण दास की जान बचाने के लिए सीमा पार गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीमा रेखांकित न हो तो भूलवश कोई सीमा पार जा सकता है
जवान ने कहा कि वह नारायण को अपने कंधे पर लादकर भारतीय सीमा में लौटे थे। उस वक्त सीमा पार करने के लिए अनुमति लेने का वक्त नहीं था। उनके मुवक्किल को सजा के तौर पर नौकरी से बर्खास्त करना अनुचित है। ऐसा अब तक किसी अन्य केस में नहीं हुआ है।’
इस पर पीठ ने कहा कि यह बात तो समझी जा सकती है कि अगर सीमा रेखांकित न हो तो भूलवश कोई सीमा के पार जा सकता है। जब सीमा रेखांकित हो तो बिना संबंधित अथॉरिटी से अनुमति लिए सीमा कैसे पार की जा सकती है? पीठ ने इस मामले का परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए केंद्र और सीआरपीएफ को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।