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सुप्रीम कोर्ट: मंदिरों पर कंट्रोल के मामले में तमिलनाडु सरकार से मांगा जवाब, पुजारियों की नियुक्ति पर भी नोटिस

Mon, 29 Aug 2022 07:27 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 29 Aug 2022 07:27 PM IST
सार

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका में तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता और अधिकारिता को चुनौती दी है। आरोप है कि कथित तौर पर इन प्रावधानों के जरिए राज्य सरकार ने मनमाने और असंवैधानिक रूप से राज्य के इन मंदिरों और हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रशासन, प्रबंधन और नियंत्रण पर कब्जा कर लिया है।

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Supreme Court seeks Tamil Nadu govt to plea claiming 40000 religious places arbitrarily taken over by govt
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में तमिलनाडु सरकार पर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने  करीब 40,000 मंदिरों और अन्य हिंदू धार्मिक संस्थानों पर मनमाने ढंग से कब्जा कर लिया है। इसके अलावा स्वामी ने इसमें तक राज्य के मंदिरों और हिंदू धार्मिक संस्थानों में 'अर्चकों' (पुजारियों) की नियुक्ति या बर्खास्तगी से राज्य सरकार को रोकने की मांग भी की थी।

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सुब्रमण्यम स्वामी ने दी थी चुनौती
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका में तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की धारा 21, 23, 27, 28, 47, 49, 49बी, 53, 55, 56 और 114 की संवैधानिक वैधता और अधिकारिता को चुनौती दी गई है। आरोप है कि कथित तौर पर इन प्रावधानों के जरिए राज्य सरकार ने मनमाने और असंवैधानिक रूप से राज्य के इन मंदिरों और हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रशासन, प्रबंधन और नियंत्रण पर कब्जा कर लिया है।
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याचिका में कहा गया है कि 'अर्चकों' की नियुक्ति और मंदिरों में उनकी भूमिका 'धर्मनिरपेक्ष गतिविधि' की परिभाषा में नहीं आती है और इसे इस तरह घोषित किया जाना चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने बार-बार कहा है कि मंदिरों को चलाने और प्रशासित करने के लिए धर्मनिरपेक्षता सरकार का विशेषाधिकार नहीं है। बता दें कि मुख्यमंत्री के बनते ही एमके स्टालिन ने मंदिरों में गैर-ब्राह्मणों को पुजारी बनाने का ऐलान किया था. हालांकि, विपक्ष इसके पूरी तरह से खिलाफ रहा। 
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सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
भाजपा नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अंतिम फैसला आने तक राज्य के मंदिरों और हिंदू धार्मिक संस्थानों में 'अर्चकों' (पुजारियों) की नियुक्ति या बर्खास्तगी से राज्य को रोकने की याचिका में मांगी गई अंतरिम राहत पर भी नोटिस जारी किया है। 

पहले से लंबित हैं कई याचिकाएं
सुनवाई करते हुए जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी से कहा कि इसी तरह के मुद्दों को उठाने वाली कुछ रिट याचिकाएं शीर्ष अदालत में पहले से लंबित हैं। न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि उनके पास उन याचिकाओं में से एक पर विचार करने का अवसर है और इस याचिका को इनके साथ सूचीबद्ध किया जा सकता है। इस पर स्वामी के वकील ने सरकार को नोटिस जारी करने की मांग की। उनकी मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सरकार से जवाब मांगा। 

कर्नाटक वक्फ बोर्ड  की याचिका पर कल होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को बेंगलुरु के चामराजपेट के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी की अनुमति देने वाले राज्य उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ कर्नाटक वक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। दरअसल, कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कर्नाटक सरकार को चामराजपेट में ईदगाह मैदान का उपयोग गणेश चतुर्थी का आयोजन करने के लिए मांग करने वाले आवेदनों पर विचार करने और उसपर उचित निर्देश पारित करने की अनुमति दी थी।


कर्नाटक उच्च न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देते हुए कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस याचिका पर भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार को मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गई।

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