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सुप्रीम कोर्ट ने जिलावार बाल यौन शोषण पर 10 दिनों के अंदर रिपोर्ट जमा करने का दिया आदेश दिया

Mon, 15 Jul 2019 01:37 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 15 Jul 2019 01:37 PM IST
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Supreme court seek data on total number of child sexual harrasment cases in 10 days 
सांकेतिक तस्वीर

उच्चतम न्यायालय ने न्यायालय की रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि वह सभी उच्च न्यायालयों की रजिस्ट्री से बाल यौन शोषण के कुल मामलों की जिलावार जानकारी इकट्ठा करे और पता लगाए कि कितने मामले लंबित पड़े हैं। मामले में 10 दिनों के अंदर रिपोर्ट जमा कराई जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

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अदालत ने डाटा इकट्ठा करने कि जिम्मेदारी वरिष्ठ वकील वी गिरी को सौंपी है। इस डाटा में पॉक्सो अधिनियम के लिए नामित विशेष अदालतों की संख्या, पॉक्सो अधिनियम के तहत नियुक्त विशेष सरकारी वकील, बाल यौन शोषण मामलों में कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं उनकी संख्या, इस तरह के कितने मामले जांच के स्तर पर हैं और कितने मामलों में ट्रायल पूरा हो चुका है शामिल होगा।  
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यह आदेश न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने दिया है। अदालत ने बाल यौन शोषण के बढ़ते मामलों में स्वत: संज्ञान लिया है। गिरी अदालत के साथ मिलकर उस तंत्र पर काम कर रहे हैं जिसके जरिए बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों का निपटारा जल्द किया जा सके।

पिछले हफ्ते अदालत ने गिरी को एक डाटा सौंपा था जिससे पता चला कि अकेले 2019 में देश के अंदर बाल यौन शोषण में 24,000 एफआईआर दर्ज की गई है। अदालत द्वारा इकट्ठा किए गए डाटा के अनुसार एक जनवरी से 30 जून 2019 के बीच 24,212 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इसमें वह मामले भी शामिल हैं जिनमें ट्रायल हो रहा है या जांच जारी है।


इनमें से अब तक केवल 911 मामले निपटाए गए हैं। यह कुल संख्या का केवल चार प्रतिशत है। सबसे ज्यादा 3457 एफआईआर उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई हैं। वहीं सबसे ज्यादा मामलों का निपटारा चंडीगढ़ में हुआ है। यहां 29 एफआईआर दर्ज हुई थीं जिसमें से 12 मामले निपट चुके हैं। कम से कम 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने एक भी मामले का निपटारा नहीं किया है।

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