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खादी पर दाग अच्छे हैं या नहीं, तय करे संसद: सुप्रीम कोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Wed, 26 Sep 2018 05:26 AM IST
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Supreme Court, Media
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राजनीति में अपराधीकरण को लोकतंत्र के किले का दीमक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संसद को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को राजनीति में प्रवेश से रोकने को लेकर कानून बनाने पर विचार करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के मसले पर अपना पल्ला झाड़ते हुए इसे संसद के विवेक पर छोड़ दिया है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है हमारे लोकतंत्र में राजनीति में अपराधीकरण रूपी इस बीमारी को खत्म करने में संसद सक्षम है। पीठ ने कहा कि यह बीमारी नाइलाज नहीं है। जरूरत इस बात की है इस बीमारी का इलाज कब शुरू किया जाए। जितनी जल्दी इलाज होगा उतनी ही जल्दी बीमारी दूर होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे पहले ही यह बीमारी लोकतंत्र के लिए नासूर न बन जाए, इसका इलाज होना चाहिए।
संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि राजनीति में अपराधीकरण हमारे संविधान और लोकतंत्र की जड़ पर चोट पहुंचाता है। पीठ ने कहा, बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जहां पार्टी के आधार पर लोग चुने जाते हैं, ऐसे में हम संसद को सुझाव देते हैं कि वह ऐसा सख्त कानून बनाए जिससे कि गंभीर आपराधिक मामले में अगर आरोप तय हो जाए तो राजनीतिक दल के लिए वैसे नेताओं की सदस्यता निरस्त करना जरूरी हो। ऐसे लोगों को न तो लोकसभा और न ही विधानसभा चुनाव का लड़ने दिया जाए।’
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यामयूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा की संविधान पीठ ने हालांकि जनप्रतिनिधि कानून के तहत आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी लगाने को अयोग्यता श्रेणी में डालने से अपना पल्ला झाड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला पीआईएल फाउंडेशन नामक एनजीओ और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:
- चुनावी नामांकन पत्र में उम्मीदवार सभी जानकारी दें
- उम्मीदवार बड़े अक्षरों में लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दें
- राजनीतिक दल से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार लंबित आपराधिक मामलों को जानकारी पार्टी को दें। राजनीतिक दल ऐसे उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी को वेबसाइट पर डालें।
- उम्मीदवार व राजनीतिक दल स्थानीय अखबारों के जरिए उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को सार्वजनिक करें। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए भी इसे प्रचारित किया जाए। नामांकन पत्र भरने के बाद कम से कम से तीन बार ऐसा प्रचार किया जाना चाहिए।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है हमारे लोकतंत्र में राजनीति में अपराधीकरण रूपी इस बीमारी को खत्म करने में संसद सक्षम है। पीठ ने कहा कि यह बीमारी नाइलाज नहीं है। जरूरत इस बात की है इस बीमारी का इलाज कब शुरू किया जाए। जितनी जल्दी इलाज होगा उतनी ही जल्दी बीमारी दूर होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे पहले ही यह बीमारी लोकतंत्र के लिए नासूर न बन जाए, इसका इलाज होना चाहिए।
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संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि राजनीति में अपराधीकरण हमारे संविधान और लोकतंत्र की जड़ पर चोट पहुंचाता है। पीठ ने कहा, बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जहां पार्टी के आधार पर लोग चुने जाते हैं, ऐसे में हम संसद को सुझाव देते हैं कि वह ऐसा सख्त कानून बनाए जिससे कि गंभीर आपराधिक मामले में अगर आरोप तय हो जाए तो राजनीतिक दल के लिए वैसे नेताओं की सदस्यता निरस्त करना जरूरी हो। ऐसे लोगों को न तो लोकसभा और न ही विधानसभा चुनाव का लड़ने दिया जाए।’
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यामयूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा की संविधान पीठ ने हालांकि जनप्रतिनिधि कानून के तहत आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी लगाने को अयोग्यता श्रेणी में डालने से अपना पल्ला झाड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला पीआईएल फाउंडेशन नामक एनजीओ और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:
- चुनावी नामांकन पत्र में उम्मीदवार सभी जानकारी दें
- उम्मीदवार बड़े अक्षरों में लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दें
- राजनीतिक दल से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार लंबित आपराधिक मामलों को जानकारी पार्टी को दें। राजनीतिक दल ऐसे उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी को वेबसाइट पर डालें।
- उम्मीदवार व राजनीतिक दल स्थानीय अखबारों के जरिए उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को सार्वजनिक करें। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए भी इसे प्रचारित किया जाए। नामांकन पत्र भरने के बाद कम से कम से तीन बार ऐसा प्रचार किया जाना चाहिए।