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पॉक्सो अदालतों में विशेष लोक अभियोजकों की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट
Mon, 13 Jan 2020 04:02 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 13 Jan 2020 04:02 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो के मामलों में पीड़ित बच्चों व गवाहों को सही तरीके सुनने, उनसे बातचीत करने के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित लोक अभियोजक होने चाहिए। कोर्ट ने ऐसे लोक अभियोजकों को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। शीर्ष अदालत बाल दुष्कर्म की लगातार बढ़ती घटनाओं को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि अभियोजकों को यह पता होना चाहिए कि यौन उत्पीड़न के पीड़ित बच्चों से सच कैसे सामने लाया जाए। पॉक्सो के केसों में लोक अभियोजक को सौंपा गया कार्य बहुत मुश्किल होता है, जिस पर अत्यंत सावधानी और संवेदनशीलता के काम करने की आवश्यकता है।
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इसके लिए न केवल विशेष लोक अभियोजकों की, बल्कि प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने की जरूरत है। ताकि पॉक्सो अदालतों में आने वाले मामलों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। इसके साथ ही पीठ ने सभी राज्यों को पॉक्सो अदालतों में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्देश दिया।
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पीठ ने कहा, हम सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध करते हैं कि राज्य की न्यायिक अकादमी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि विशेष लोक अभियोजक को न सिर्फ कानून का प्रशिक्षण मिले, बल्कि बाल मनोविज्ञान, बाल व्यवहार, स्वास्थ्य मुद्दों की भी उन्हें जानकारी हो।
पीठ ने असम और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 28 फरवरी तक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया कि पॉक्सों अदालतों में विशेष तौर पर इन्हीं मामलों की सुनवाई होनी चाहिए, दूसरे मामलों की नहीं।