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SC: अग्रिम जमानत याचिका लंबित रहते हुए भी ट्रॉयल कोर्ट जारी कर सकती है उद्घोषणा नोटिस, शीर्ष कोर्ट की टिप्पणी

Thu, 14 Mar 2024 08:58 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 14 Mar 2024 08:58 PM IST
सार

पटना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर जस्टिस सीटी कुमार और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इसमें हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता और रोकथाम के विभिन्न प्रावधानों के तहत कथित अपराधों के लिए दर्ज प्राथमिकी के संबंध में अपीलकर्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

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Supreme court says Pendency of anticipatory bail plea no bar for trial courts to proceed with proclamation
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किए जाने से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है। इस दौरान शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत याचिका का लंबित रहना ट्रायल कोर्ट को उद्घोषणा नोटिस जारी करने से नहीं रोकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इतना ही नहीं, ट्रॉयल कोर्ट इस अवधि में किसी फरार आरोपी की संपत्तियों की कुर्की का आदेश भी दे सकती है।  

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इस दौरान पीठ ने कहा कि भले ही अग्रिम जमानत देने की शक्ति एक असाधारण शक्ति है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि अग्रिम जमानत एक नियम है। भले ही कई मामलों में यह माना गया है कि जमानत एक नियम है। 
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पीठ ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत देने का सवाल प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अदालत के सतर्क और विवेकपूर्ण विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए। इस शक्ति का इस्तेमाल करते समय संबंधित अदालत को बहुत सतर्क रहना होगा, क्योंकि गंभीर मामलों में अभियुक्तों को अंतरिम सुरक्षा या संरक्षण देने से न्याय में बाधा आ सकती है। इतना ही नहीं, इससे मामले की जांच में भी काफी हद तक समस्या पैदा हो सकती है। क्योंकि इससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ या भटकाव हो सकता है। 
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पटना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर जस्टिस सीटी कुमार और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इसमें हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता और रोकथाम के विभिन्न प्रावधानों के तहत कथित अपराधों के लिए दर्ज प्राथमिकी के संबंध में अपीलकर्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में अपीलकर्ताओं का आचरण उन्हें गिरफ्तारी पूर्व जमानत का लाभ लेने का अधिकार नहीं देता है।

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