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Supreme Court: 'अमीरों की जीवनशैली के चलते मुश्किलें झेलते हैं गरीब', दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर कोर्ट सख्त

Mon, 15 Dec 2025 11:32 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 15 Dec 2025 11:32 PM IST
सार

Supreme Court on Delhi-NCR Air Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि अमीरों की जीवनशैली से पैदा हुई समस्या का बोझ गरीबों पर पड़ता है। अदालत ने संकेत दिए कि वह प्रभावी और लागू करने योग्य आदेश देगी।

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Supreme Court says on delhi ncr air pollution poor suffer due lifestyles of rich persons
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि अमीरों की जीवनशैली से पैदा होने वाली समस्याओं का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब वर्ग को भुगतना पड़ता है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि वह वायु प्रदूषण पर ऐसे प्रभावी और लागू करने योग्य आदेश पारित करेगी, जिनका जमीन पर असर दिखे। इस मामले में अगली अहम सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक न्याय से भी जुड़ गया है। निर्माण कार्य बंद होने, आवाजाही पर रोक और गतिविधियों पर पाबंदियों का असर सीधे गरीब मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों पर पड़ता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस असंतुलन को नजरअंदाज नहीं कर सकती और समाधान ऐसा होना चाहिए, जिसमें नियमों का पालन भी हो और कमजोर वर्ग पर बोझ भी न पड़े।
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लागू होंगे सख्त और असरदार आदेश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अदालत ऐसे निर्देश देगी, जिन्हें केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें सख्ती से लागू किया जा सके। पीठ ने कहा कि कई नियम और प्रोटोकॉल पहले से मौजूद हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उनका सही तरीके से पालन नहीं होता। यही वजह है कि हालात हर साल और गंभीर होते जा रहे हैं।
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नियम हैं, पर अमल नहीं
न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए निवारक उपाय पहले से तय हैं, लेकिन अधिकारी तभी सक्रिय होते हैं, जब अदालत हस्तक्षेप करती है। उन्होंने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट आदेश नहीं देता, तब तक एजेंसियां जिम्मेदारी से काम नहीं करतीं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत को इस स्थिति का पूरा अहसास है और इसी कारण ऐसे आदेश दिए जाएंगे, जिनका पालन कराना संभव हो।

बच्चों की सेहत पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा भी उठा। एक वकील ने बताया कि अदालत के पुराने आदेशों के बावजूद कई स्कूल बाहरी खेल गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं। न्यायमित्र ने भी कहा कि स्कूल आदेशों से बचने के नए तरीके खोज रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई और कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।



ग्रेप-4 से गरीबों पर असर
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने अदालत को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप-4 की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। इससे निर्माण कार्य बंद हो गए हैं और बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। न्यायमित्र ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के उपायों का बोझ बार-बार गरीबों पर ही पड़ता है, जबकि समस्या की जड़ अमीरों की जीवनशैली और संसाधनों का अत्यधिक इस्तेमाल है।

जीवनशैली बदलने की जरूरत
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि महानगरों में रहने वाले लोगों को अपनी जीवनशैली बदलनी होगी। उन्होंने साफ कहा कि समस्या धनी वर्ग से पैदा होती है, लेकिन असर गरीबों पर पड़ता है। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ निर्देश ऐसे होंगे, जिन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा और लोगों को हालात के अनुरूप ढलना होगा।

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदूषण को देखते हुए वकीलों और पक्षकारों को हाइब्रिड मोड में पेश होने की सलाह दी है। प्रशासन की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि यदि संभव हो तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हों। सोमवार को दिल्ली घने कोहरे में डूबी रही और एक्यूआई 498 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।


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