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SC: 25 साल से अलग रह रहे दंपती को विवाह बंधन में बंधे रहने के लिए कहना क्रूरता, अदालत ने तलाक को दी मंजूरी
Thu, 27 Apr 2023 10:49 PM IST
देव कश्यप
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 27 Apr 2023 10:49 PM IST
सार
न्यायालय ने इस बात को संज्ञान में लिया कि पति-पत्नी पिछले 25 साल से अलग रह रहे थे। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत के पति को तलाक की डिक्री देने के आदेश को बरकरार रखा और हाईकोर्ट के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि “उनकी शादी भंग हो जाएगी”।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
25 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी को शादी के बंधन से मुक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दंपती को विवाह बंधन में बंधे रहने के लिए कहना ‘क्रूरता’ को मंजूरी देना है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ पति की अपील पर यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट द्वारा कहा गया था कि उसकी पत्नी द्वारा उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करना क्रूरता नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा पति के खिलाफ दायर आपराधिक मामलों की संख्या बहुत अधिक है।
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जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने दिल्ली के जोड़े के विवाह को खत्म करते हुए कहा कि हमारे सामने एक ऐसा शादीशुदा जोड़ा है, जो मुश्किल से चार साल तक जोड़े के रूप में साथ रहा और पिछले 25 साल से अलग रह रहा है। उनका कोई बच्चा भी नहीं है। इनका वैवाहिक बंधन पूरी तरह से टूटा हुआ है और ‘मरम्मत’ से परे है। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह रिश्ता खत्म होना चाहिए, क्योंकि इसकी निरंतरता ‘क्रूरता’ को मंजूरी देना होगा। पीठ ने कहा कि लंबी जुदाई व सहवास नहीं होना तथा सभी सार्थक बंधनों का पूरी तरह से विराम और दोनों के बीच मौजूदा कड़वाहट हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(1) (आईए) के तहत ‘क्रूरता’ के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
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वैवाहिक रिश्ता खत्म होने से सिर्फ ये दोनों ही प्रभावित होंगे
पीठ ने कहा कि उसने इस बात पर भी गौर किया है कि उनके वैवाहिक रिश्ते को खत्म करने से सिर्फ वही दोनों प्रभावित होंगे, क्योंकि दंपती का कोई बच्चा नहीं है। यह देखते हुए कि पति का वर्तमान वेतन एक लाख रुपये प्रति महीने से अधिक है, पीठ ने पति को निर्देश दिया है कि वह पत्नी को चार हफ्ते के भीतर 30 लाख रुपये दे।
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पति का आरोप, पत्नी को उसका छोटा घर पसंद नहीं
दंपती की शादी दिल्ली में अप्रैल, 1994 में हिंदू रीति रिवाजों के तहत हुई थी, लेकिन जल्द ही उनके रिश्ते में कड़वाहट आ गई। पति का आरोप था कि पत्नी को उसका छोटा घर पसंद नहीं था और वह भद्दे शब्दों का प्रयोग करती थी। पति का यह भी आरोप था कि 1994 में उसे बिना बताए पत्नी ने गर्भपात कराया था।
पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का दर्ज कराया था केस
चार साल बाद पत्नी ने पति का घर छोड़ दिया और पति व उसके भाई पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया। इस पर पुलिस ने पति और उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, बाद में दोनों को जमानत मिल गई थी। इसके बाद पत्नी ने ससुरालियों के खिलाफ और भी आपराधिक शिकायतें कीं।