फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Says Lapse of time between injury, death doesn't reduce liability in murder case

Supreme Court: कोर्ट ने कहा- चोट लगने के लंबे समय बाद पीड़ित की मौत हो, तो भी आरोपी की जिम्मेदारी कम नहीं होती

Fri, 27 Jan 2023 02:38 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 27 Jan 2023 02:38 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए कहा कि जब किसी अभियुक्त द्वारा दी गई चोटों के कारण काफी समय बीत जाने के बाद पीड़ित की मृत्यु हो जाती है, तो इससे हत्या के मामले में अपराधी की जिम्मेदारी कम नहीं होगी।

विज्ञापन
Supreme Court Says Lapse of time between injury, death doesn't reduce liability in murder case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

किसी शख्स द्वारा पहुंचाई गई चोट के कारण अगर लंबे समय बाद पीड़ित की मौत हो जाती है, तो इससे हत्या के मामले में आरोपी की जिम्मेदारी कम नहीं होती। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के खिलाफ दोषियों की याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की। जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस एस. रवींद्र भट की पीठ ने मंगलवार को यह बात कही।

विज्ञापन


सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि हमले के 20 दिन बाद पीड़ित की मौत हुई थी। इससे पता चलता है कि हमले के दौरान पहुंचे चोट से मौत नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार फरवरी 2012 में आरोपियों ने पीड़ित की विवादित जमीन को जेसीबी से समतल करने का प्रयास किया था और इसी दौरान दोनों पक्षों में बहस हो गई फिर आरोपियों ने कुल्हाड़ी से वार कर दिया।  उसकी मौत के बाद पीड़ित परिजनों ने अपीलकर्ताओं के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया था।
विज्ञापन


सर्जरी में जटिलताओं के कारण पीड़ित की मृत्यु हुई: आरोपी के वकील
अभियुक्तों ने तर्क दिया कि कथित घटना के लगभग बीस दिनों के बाद और सर्जरी में जटिलताओं के कारण पीड़ित की मृत्यु हुई, उनके कथित हमले के कारण मौत नहीं हुई। शीर्ष अदालत ने कहा कि सवाल यह है कि क्या अपीलकर्ता हत्या के अपराध के दोषी हैं, धारा 302 के तहत दंडनीय है, या क्या वे कम गंभीर धारा 304, आईपीसी के तहत आपराधिक रूप से उत्तरदायी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने हमलावर की दलील को खारिज किया
पीठ ने कहा, यह अदालत यह स्वीकार करने में कोई कठिनाई नहीं देखती है कि अपीलकर्ता हमलावर थे। पीठ ने आगे कहा कि इस मामले में चिकित्सकीय ध्यान की पर्याप्तता या अन्यथा कोई प्रासंगिक कारक नहीं है, क्योंकि पोस्ट-मॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मौत कार्डियो रेस्पिरेटरी फेलियर के कारण हुई थी, जो चोटों के परिणामस्वरूप हुई थी। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed