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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- उम्मीद है मोदी सरकार जल्द करेगी लोकपाल की नियुक्ति

Tue, 17 Apr 2018 02:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 17 Apr 2018 02:14 PM IST
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supreme court says it expects modi government will appoint lokpal at soon
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को लोकपाल की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट की ओर से उम्मीद जताई गई कि मोदी सरकार जल्द ही लोकपाल की नियुक्ति करेगी। जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की संवैधानिक पीठ ने इस संदर्भ में कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट 15 मई को मामले की सुनवाई करेगा।

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केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि नामचीन हस्ती की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया जारी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार लोकपाल की नियुक्ति पर काम कर रही है।वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार जानबूझकर नियुक्ति को लटका रही है। पिछली सुनवाई में केंद्र ने कहा था कि लोकपाल की नियुक्ति को लेकर मीटिंग हुई। केंद्र ने कहा सबसे पहले एमिनेंट जूरिस्ट की नियुक्ति करेंगे। 
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पिछले महीने हुई सुनवाई में केंद्र ने लोकपाल की नियुक्ति में देरी पर बात रखी। केंद्र की ओर से कहा गया कि लोकपाल कानून के मुताबिक चयन समिति में विपक्ष के नेता का होना जरूरी होता है, लेकिन 16वीं लोकसभा में किसी को भी विपक्ष का नेता घोषित नहीं किया गया है। 
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सीटों का आंकड़ा देखा जाए तो इस समय कांग्रेस सदन की मुख्य विपक्षी पार्टी है, लेकिन उसकी ओर से भी विपक्ष का नेता घोषित नहीं किया गया है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को लोकपाल चयन समिति में विशेष आमंत्रण दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।

खड़गे ने किया इनकार

supreme court says it expects modi government will appoint lokpal at soon
कांग्रेस

खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। साथ पुराने पत्र में उठाई गई चिंता पर कुछ न किए जाने पर चिंता जताई है। दरअसल लोकसभा में कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी जरूर है लेकिन पर्याप्त सांसद संख्या न होने से उसे वह दर्जा हासिल नहीं है। 

खड़गे का कहना है कि इस अहम बैठक में उन्हें बतौर विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल होने को कहा गया है। कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। सदस्य का दर्जा मिले बिना उनके बैठक में जाने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि उनके पास कोई अधिकार नहीं होगा। न तो वे अपनी कोई राय रख सकेंगे और न ही मताधिकार होगा। 

ऐसे में औपचारिकता पूरी से कोई फायदा नहीं है। उनका कहना है कि बहुत निराशाजनक कि उनके पूर्व में भेजे गए पत्र का कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। उन्होंने अपने पिछले पत्र में जो चिंता जताई थी उस पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। 

उनका कहना है कि सरकार दोहरा मानदंड अपना रही है। दिल्ली पुलिस एक्ट में संशोधन के लिए वह अध्यादेश लेकर आई और बिना विपक्ष की भूमिका उसे पूरा कर लिया। ऐसे में अगर सरकार अगर सबसे बड़ी पार्टी की उपेक्षा कर ऐसा करना चाहती है तो इसके लिए भी अध्यादेश ले आए। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी सरकार ने बीते चार साल गवां दिए हैं। विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी की उपेक्षा करने से साबित होता है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने को इच्छुक नहीं है। जबकि कानून के मुताबिक लोकसभा में विपक्षी पार्टी का सदस्य चयन समिति की बैठक में शामिल किया जाना चाहिए। 

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