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हमसे भी ऊपर कोई अदालत होती तो हमारे आधे आदेशों को पलट दिया जाता : सुप्रीम कोर्ट

Tue, 19 Jan 2021 03:54 AM IST
देव कश्यप राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 19 Jan 2021 03:54 AM IST
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Supreme Court says if any court above us then half of our orders would have been overturned
supreme court - फोटो : पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यदि हमसे भी ऊपर कोई अदालत होती तो हमारे आधे आदेशों को पलट दिया जाता। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक किरायेदार को परिसर खाली करने का आदेश देते हुए की।

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जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि 'अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा पारित प्रत्येक आदेश के खिलाफ अपील दायर करने का एक अंत तो होना ही चाहिए।'
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पीठ ने साफ शब्दों में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करने में सावधानी बरतनी चाहिए, जब अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा एकसमान रूप से विवाद का निपटारा एक निश्चित वर्ग या पक्ष में किया गया है। पीठ ने कहा है कि सैद्धांतिक रूप में शीर्ष अदालत को तब हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जब सभी अधीनस्थ न्यायालयों का फैसला समान हो।
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पीठ ने कहा, अगर हम हर मामले को अत्यधिक बारीकी व आत्मीयता के साथ देखना शुरू कर दें तो हम वह कर्तव्य नहीं निभा पाएंगे, जिसकी इस अदालत को हमसे अपेक्षा है। निर्णय लेने में कुछ निरंतरता होनी चाहिए और यदि अगर हमने अपवाद बनाना शुरू कर दिया तो यह अपने आप में एक समस्या होगी। पीठ ने यह भी कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ निश्चित सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए और इसे चौथे न्यायालय के रूप में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं कहा जा सकता है। किसी बिंदु पर तो इसे खत्म होना ही चाहिए। अगर हमारे ऊपर अदालत होती तो हमारे 50 फीसदी आदेश भी पलट दिए जाते।

यह है मामला
शीर्ष अदालत एक किरायेदार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने किरायेदार आर्य कन्या पाठशाला को परिसर खाली करने का आदेश दिया था, जिसे उसने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट से पहले अतिरिक्त किराया नियंत्रक और किराया नियंत्रण न्यायाधिकरण ने भी आर्य कन्या पाठशाला को परिसर खाली करने का आदेश दिया था।


याची ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की थी
पाठशाला की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया क्योंकि यह छात्राओं की पढ़ाई से जुड़ा मसला है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीनों अधीनस्थ फोरम द्वारा एक जैसा आदेश पारित किया है, ऐसे में हमारे लिए दखल देना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए 30 जून तक शांतिपूर्ण तरीके से परिसर खाली करने का आदेश दिया।

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