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SC: पाकिस्तान का आजादी दिवस मनाने के खिलाफ दर्ज मुकदमा खारिज, कोर्ट ने कहा- हर किसी को असहमति का अधिकार
Fri, 08 Mar 2024 09:58 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 08 Mar 2024 09:58 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि 'भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(ए) के तहत लोगों को बोलने और अपने विचार व्यक्त करने की आजादी है। इस गारंटी के तहत हर नागरिक को अधिकार है कि वह अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले की आलोचना कर सकता है।'
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक अहम फैसले में असहमति के अधिकार को बरकरार रखते हुए कहा कि देश के हर नागरिक को सरकार की आलोचना करने का अधिकार है और अगर इस पर रोक लगाई गई तो देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि पुलिस को संविधान में मिले बोलने के अधिकार को ध्यान में रखना चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर के एक प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज मुकदमे को खारिज कर दिया। प्रोफेसर ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले की आलोचना की थी।
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने कहा कि 'भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(ए) के तहत लोगों को बोलने और अपने विचार व्यक्त करने की आजादी है। इस गारंटी के तहत हर नागरिक को अधिकार है कि वह अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले की आलोचना कर सकता है, साथ ही सरकार के हर उस फैसले की आलोचना कर सकता है, जिससे उसकी असहमति है। उसे सरकार के फैसलों से असहमत होने का पूरा अधिकार है।'
क्या है मामला
महाराष्ट्र के कोल्हापुर के एक कॉलेज में पढ़ाने वाले कश्मीरी प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम ने सरकार के जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले की आलोचना की थी और अपने वाट्सएप स्टेटस पर 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर के लिए काला दिवस बताया था। साथ ही प्रोफेसर ने 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस का भी कथित जश्न मनाया था। इस मामले में प्रोफेसर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उस मुकदमे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 5 अगस्त को काला दिवस कहना उसके विरोध और दर्द की अभिव्यक्ति है। साथ ही पाकिस्तान के लोगों को हैप्पी इंडिपेंडेंस कहना एक अच्छी भावना से किया गया काम है। इसमें कहीं भी वैमनस्यता, नफरत और दो वर्गों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की भावना नहीं दिखती।
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सर्वोच्च अदालत की जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुयन की पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 'यही समय है जब हमें अपनी पॉलिसी मशीनरी को बोलने की आजादी और विचार व्यक्त करने की आजादी के बारे में शिक्षित करना है, जो हमें संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत मिली हुई है। नीतियां लागू करने वाले लोगों को संविधान के लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।'
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कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने कहा कि 'भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(ए) के तहत लोगों को बोलने और अपने विचार व्यक्त करने की आजादी है। इस गारंटी के तहत हर नागरिक को अधिकार है कि वह अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले की आलोचना कर सकता है, साथ ही सरकार के हर उस फैसले की आलोचना कर सकता है, जिससे उसकी असहमति है। उसे सरकार के फैसलों से असहमत होने का पूरा अधिकार है।'
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क्या है मामला
महाराष्ट्र के कोल्हापुर के एक कॉलेज में पढ़ाने वाले कश्मीरी प्रोफेसर जावेद अहमद हजाम ने सरकार के जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले की आलोचना की थी और अपने वाट्सएप स्टेटस पर 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर के लिए काला दिवस बताया था। साथ ही प्रोफेसर ने 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस का भी कथित जश्न मनाया था। इस मामले में प्रोफेसर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उस मुकदमे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 5 अगस्त को काला दिवस कहना उसके विरोध और दर्द की अभिव्यक्ति है। साथ ही पाकिस्तान के लोगों को हैप्पी इंडिपेंडेंस कहना एक अच्छी भावना से किया गया काम है। इसमें कहीं भी वैमनस्यता, नफरत और दो वर्गों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की भावना नहीं दिखती।
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सर्वोच्च अदालत की जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुयन की पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 'यही समय है जब हमें अपनी पॉलिसी मशीनरी को बोलने की आजादी और विचार व्यक्त करने की आजादी के बारे में शिक्षित करना है, जो हमें संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत मिली हुई है। नीतियां लागू करने वाले लोगों को संविधान के लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।'