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सुप्रीम कोर्ट : जीएसटी कानून की संकल्पना को खत्म करने की हो रही है कोशिश
Thu, 08 Apr 2021 02:57 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 08 Apr 2021 02:57 AM IST
सार
- पीठ ने कहा, अधिकारियों द्वारा बिना किसी जवाबदेही के व्यवसायियों से भारी रकम की मांग की जाती है।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स अथॉरिटी द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू करने के तरीके पर सख्त नारजगी जताई है। शीर्ष कोर्ट ने कहा, टैक्स वसूलने वाले अधिकारी सभी व्यवसाइयों को धोखेबाज नहीं बता सकते।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने मौखिक तौर पर कहा, संसद की मंशा थी कि जीएसटी नागरिकों के अनुकूल कर ढांचा हो, लेकिन जिस तरह से इसे देश भर में लागू किया जा रहा है वह इसके उद्देश्य को खत्म कर रहा है।
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पीठ हिमाचल प्रदेश जीएसटी अधिनियम के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अधिनियम की धारा-83 के तहत मामले की कार्यवाही के दौरान अथॉरिटी द्वारा बैंक खाते समेत संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त करने का प्रावधान है। याचिका राधाकृष्ण इंडस्ट्रीज द्वारा दायर की गई है।याचिका में कहा गया है कि धारा-83 के तहत जब्ती की कार्रवाई का प्रावधान बेरहम व कठोर है।
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पीठ ने कहा, अधिकारियों द्वारा बिना किसी जवाबदेही के व्यवसायियों से भारी रकम की मांग की जाती है। अगर 10 हजार करोड़ की मांग की जाती है तो अदालत उसे घटाकर एक हजार कर देती है। इससे कर अधिकारियों का आकलन भलीभांति समझा जा सकता है। पीठ ने मौखिक तौर पर संपत्ति की अस्थायी जब्ती को कठोर भी बताया।
पीठ ने कहा, अधिकारियों को सरकार के राजस्व को संरक्षित करने और अच्छी नीयत से व्यवसाय करने वालों के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।