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सुप्रीम कोर्ट: भारत में आम आदमी भ्रष्टाचार से जूझ रहा, सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत

Fri, 24 Feb 2023 10:57 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Fri, 24 Feb 2023 10:57 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर भारत को वास्तव में वह बनना है जिसके लिए वह प्रयास कर रहा है तो उसे अपने मूल मूल्यों और चरित्र पर वापस जाना होगा।

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Supreme Court says Common man in India is battling corruption News in Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि भारत में आम आदमी भ्रष्टाचार से जूझ रहा है और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की है, जिसनें उन लागों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई, जिनके खिलाफ आपराधिक मामलों में चुनाव लड़ने से आरोप तय किए गए हैं। 

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शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर भारत को वास्तव में वह बनना है जिसके लिए वह प्रयास कर रहा है तो उसे अपने मूल मूल्यों और चरित्र पर वापस जाना होगा। अदालत ने कहा, किसी भी सरकारी कार्यालय में जाएं, आप सुरक्षित नहीं निकल सकते। प्रसिद्ध न्यायविद नानी पालखीवाला ने अपनी पुस्तक 'वी द पीपल' में इस बारे में बात की है। अगर हमें वास्तव में एक राष्ट्र बनना है तो हम के लिए प्रयास कर रहे हैं, हमें अपने मूल मूल्यों और चरित्र पर वापस आने की जरूरत है।
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याचिका में क्या कहा गया?
यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि एक व्यक्ति जिसके खिलाफ जघन्य अपराध में आरोप तय किए गए हैं, वह सरकारी कार्यालय में सफाई कर्मचारी या पुलिस कांस्टेबल भी नहीं बन सकता है, लेकिन वही व्यक्ति मंत्री बन सकता है, भले ही उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया हो। याचिका में कहा गया है कि 2019 में लोकसभा चुनाव के 539 विजेताओं में से 233 (43 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए, याचिका में कहा गया है कि 2009 के बाद से गंभीर आपराधिक मामलों वाले सांसदों की संख्या में 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उपाध्याय ने कहा कि मैंने संपत्ति को आधार से जोड़ने के लिए एक जनहित याचिका दायर की, जिससे इस तरह भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सके। हमें भारत में 500 या 2000 रुपए के नोटों की जरूरत नहीं है, क्योंकि ज्यादातर लोगों के पास क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड है। 
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लोकतंत्र के नाम पर जो हो रहा, उस पर कुछ नहीं कह सकते
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जोसेफ ने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उस पर वह कुछ नहीं कहना चाहेंगे। इस मुद्दे पर एक संविधान पीठ का फैसला है और अदालत ने माना है कि यह कानून में कुछ भी नहीं जोड़ सकता है। यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस पर गौर करे। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

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