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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: ग्रामीण परिवेश से और युवा होना आपराधिक व्यवहार को क्षमा करने का आधार नहीं हो सकता
Wed, 25 Aug 2021 11:16 PM IST
गौरव पाण्डेय
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 25 Aug 2021 11:16 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को दरकिनार कर दिया है जिसमें दिल्ली पुलिस को आपराधिक मामलों के बावजूद पुलिस कॉन्स्टेबल चयन के लिए कुछ उम्मीदवारों पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जस्टिस केएम जोसेफ और एस रवींद्र भट की पीठ ने कम उम्र और ग्रामीण परिवेश के आधार पर उम्मीदवारों के आपराधिक व्यवहार के प्रति हल्का दृष्टिकोण अपनाने पर दिल्ली हाईकोर्ट की आलोचना की है।
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पीठ ने कहा है कि उमीदवारों के उम्र और ग्रामीण परिवेश को लेकर हाईकोर्ट की ओर से की गई टिप्पणी से यह बोध जाता है कि छोटे अपराध और दुराचार की सामान्य रूप से स्वीकार्यता है। हाईकोर्ट का आदेश एक व्यापक दृष्टिकोण को इंगित करता है कि युवाओं की उम्र और ग्रामीण परिवेश को देखते हुए इस तरह के दुराचार को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि इस अदालत की राय है कि अपराधी के आचरण को क्षमा करने का इस तरह का सामान्यीकरण, न्यायिक फैसले का हिस्सा नहीं होना चाहिए। जस्टिस भट द्वारा लिखे इस फैसले में कहा गया है कि कुछ प्रकार के अपराध जैसे महिलाओं के साथ छेड़छाड़, बिना अनुमति दूसरे के परिसर में प्रवेश करना, हमला करना, चोट या गंभीर चोट पहुंचाना आदि ग्रामीण परिवेश में जाति या पदानुक्रम आधारित व्यवहार को भी इंगित करता है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि चूंकि चयन पुलिस बल के लिए था और जिन्हें कानून और व्यवस्था बनाए रखने व अराजकता से निपटने का काम सौंपा जाना था इसलिए जनता के विश्वास को प्रेरित करने के लिए चयन अथॉरिटी द्वारा सघन परीक्षण जरूरी है।
बता दें कि इस मामले में वर्ष 2010 में चयन अथॉरिटी ने कुछ उम्मीदवारों की नियुक्ति को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया था कि उन्हें आपराधिक कार्यवाही का सामना करना पड़ा था और उनमें से ज्यादातर में आरोप भी तय किए गए थे। लेकिन बाद में दोनों पक्षों में समझौता होने के कारण ये मुकदमे समाप्त हो गए थे।
जिसके बाद इन लोगों ने उम्मीदवारी खारिज करने वाले इन आदेशों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण(कैट) का दरवाजा खटखटाया था। कैट ने उन उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला दिया था। दिल्ली पुलिस ने कैट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने भी उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला सुनाया था।