सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता आधार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार से बैंक धोखाधड़ी को नहीं रोका सकता। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि आधार के जरिए बैंक धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।आधार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने आधार को महत्व बताते हुए कहा कि इससे बैंक धोखाधड़ी पर लगाम लग सकती है।
इस पर पीठ ने कहा कि आधार का बैंक धोखाधड़ी से कोई लेना देना नहीं है। आधार, बैंक धोखाधड़ी का समाधान नहीं है। पीठ ने कहा कि आधार हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती है, खासकर बैंक धोखाधड़ी की।
पीठ ने कहा कि बैंक, धोखाधड़ी करने वाले को जानता है। बैंक को पता होता है कि उसने किसे लोन दिया है। वास्तव में धोखाधड़ी तब होती है जबकि बैंक अधिकारी धोखेबाज से मिलकर सांठ-गांठ करते हैं। बैंक धोखाधड़ी रोकने में आधार की भूमिका नहीं हो सकती।
पीठ ने कहा कि हम समझ सकते हैं कि कल्याणकारी योजनाओं में तो आधार अहम भूमिका निभा सकता है, लेकिन हमें बैंक धोखाधड़ी को रोकने में आधार की भूमिका नहीं नजर आती। पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार आधार को समाज में असमानता को दूर करने का मजबूत उपकरण बता सकती है, लेकिन हकीकत यह है कि असमानता बढ़ रही है। ऐसा कतई नहीं है कि भारत ने असमानता से पार पा लिया है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने अटॉर्नी जनरल से यह भी सवाल कि सिम कार्ड लेने के लिए आधार जरूरी क्यों हैं? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गलत तरीके से सिम कार्ड हासिल करते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि आतंकवादी को सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल करते हें।