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क्यों न स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य किया जाए: SC

Tue, 18 Apr 2017 10:40 PM IST
amarujala.com- Submitted By: अभिषेक तिवारी
amarujala.com- Submitted By: अभिषेक तिवारी Updated Tue, 18 Apr 2017 10:40 PM IST
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Supreme Court said why it is mandatory to play Vande Mataram in schools
सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF

स्कूलों में राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) गाना अनिवार्य करने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। वहीं  देश भर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने फेरबदल करते हुए दिव्यांगों की कुछ श्रेणियों को राष्ट्रगान चलने के दौरान खड़े होने से छूट दे दी है।

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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा है कि क्यों नहीं स्कूलों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। पीठ ने सरकार को चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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वहीं राष्ट्रगान को लेकर दाखिल एक अन्य याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस बात भी परीक्षण करने केलिए कहा कि राष्ट्रगान का सम्मान न करने वालों के लिए सजा का प्रावधान होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता श्याम नारायण चौकसी को याचिका में संशोधित करने की इजाजत दे दी है। मालूम हो कि श्याम नारायण की ही याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 30 नवंबर महीने देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने और दर्शकों में सम्मान में खड़े होने का आदेश दिया था।
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श्याम नारायण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने पीठ केसमक्ष कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान न करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है लेकिन राष्ट्रगान का अपमान करने वालों के लिए सजा का प्रावधान नहीं है। लिहाजा सरकार को इसके लिए भी कानून बनाने का निर्देश देना चाहिए।

वहीं नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर दी राइट्स और डिजेबल्ड(एनपीआरडी) की याचिका पर पीठ ने अपने 30 नवंबर के फैसले में बदलाव करते हुए व्हील चेयर का इस्तेमाल करने वाले, नेत्रहीन, बधिर, पार्किंसन रोग पीड़ित सहित कई अन्य श्रेणी केदिव्यांगों को राष्ट्रगान बजने केवक्त खड़े होने से मुक्त कर दिया है। इसके अलावा पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है जिसमें 30 नवंबर केफैसले को वापस लेने का आग्रह किया गया है। अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।


हालांकि वहीं सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राष्ट्रगान के सम्मान के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। जब भी राष्ट्रगान बजे, लोगों को खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि एक जनहित याचिका दायर कर राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दिखाने को लेकर अदालत से निर्देश देने की गुहार की गई। किसी भी सभ्य देश के लिए राष्ट्रगान गौरव की बात होती है।

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