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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत और तेजपाल से कहा, बयान नहीं मानेंगे तो पुराने मामले की होगी सुनवाई

Tue, 04 Aug 2020 11:14 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 04 Aug 2020 11:14 PM IST
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Supreme Court said to prashant Bhushan and Tejpal if the do not accept statement the court will hear 2009 contempt case
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अधिवक्ता प्रशांत भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल को स्पष्ट किया कि अगर वह उनके स्पष्टीकरण या माफी को स्वीकार नहीं करता है तो उनके खिलाफ 2009 के आपराधिक अवमानना के मामले की सुनवाई की जाएगी। शीर्ष अदालत ने नवंबर, 2009 में प्रशांत भूषण और तेजपाल के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किए थे क्योंकि एक पत्रकार में दिए गए इंटरव्यू में शीर्ष अदालत के कुछ पीठासीन और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर आक्षेप लगाए गए थे।

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न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि न्यायालय को भूषण और तेजपाल से अभी तक स्पष्टीकरण या माफीनामा नहीं मिला है और इसे स्वीकार करने या नहीं करने के बारे में वह अपना आदेश सुनाएगा।
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पीठ ने कहा कि अगर यह स्पष्टीकरण/माफीनामा स्वीकार नहीं करते हैं तो फिर हम इस मामले की सुनवाई करेंगे। इस मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान भूषण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन से पीठ ने कहा कि इसमें बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी भी है और न्यायालय की अवमानना भी है।
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पीठ ने कहा, आप बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खड़े हुए हैं लेकिन हो सकता है कि आप अवमानना की बारीक लाइन लांघ गए हों। हम इस व्यवस्था की गरिमा की रक्षा कैसे करें? मैं न्याय मित्र के रूप में आपसे जानना चाहता हूं ताकि हम इस टकराव को टाल सकें। हमें आप कुछ सुझाव दीजिए क्योंकि यह व्यवस्था आपकी भी है। 


धवन ने कहा कि स्व. विधिवेत्ता राम जेठमलानी ने इस मामले में सुझाव दिया था जिसे अगर स्वीकार कर लिया जाए तो सारे विवाद को खत्म किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि वह बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश नहीं लगाना चाहती लेकिन अवमानना के लिये बहुत बारीक लाइन है।

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