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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: देश में नेशनल मॉडल बिल्डर-बायर्स अग्रीमेंट होना चाहिए, घर खरीदारों को बिल्डर के मनमाने शर्तों पर नहीं छोड़ा जा सकता

Mon, 17 Jan 2022 10:11 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 17 Jan 2022 10:11 PM IST
सार

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि याचिका में जो कहा गया है उसे भूल जाइए। हम बड़े जनहित में हैं, खासकर मध्यम वर्ग के घर खरीदारों के लिए, जो बिल्डरों द्वारा लूटे गए हैं।

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Supreme Court said That There should be a national model builder buyers agreement in the country home buyers cannot be left on the builders arbitrary terms
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि देश में नेशनल मॉडल बिल्डर-बायर्स अग्रीमेंट होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घर खरीदारों को  रियल एस्टेट डेवलपर्स द्वारा अपने अनुबंधों में शामिल किए गए सनकी या मनमाने खंड की दया पर नहीं छोड़ा जाए। शीर्ष अदालत ने  केंद्र सरकार को एक मॉडल हाउसिंग अग्रीमेंट तैयार करना पर विचार करने के लिए कहा है।

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जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने लोगों, खासतौर पर मध्यम वर्ग के घर खरीदारों की परेशानी का जिक्त्रस् करते हुए केंद्र से रियल एस्टेट विनियमन और विकास (रेरा) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों की जांच करने का आग्रह किया ताकि एक मॉडल अग्रीमेंट तैयार करने पर विचार किया जा सके। पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय मॉडल बिल्डर-बायर्स अग्रीमेंट तैयार करे। वर्तमान में बिल्डर्स कोई भी शर्त लगा सकते हैं और अनजान खरीदारों का शोषण कर सकते हैं। हम चाहते हैं कि राज्यों के अपने नियम होने की बजाय केंद्र हस्तक्षेप करे।
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पीठ ने कहा कि वह व्यापक जनहित में वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका की जांच कर रही है। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि याचिका में जो कहा गया है उसे भूल जाइए। हम बड़े जनहित में हैं, खासकर मध्यम वर्ग के घर खरीदारों के लिए, जो बिल्डरों द्वारा लूटे गए हैं। पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय मॉडल अग्रीमेंट में सभी बिल्डरों के लिए बाध्यकारी कुछ मानक शर्तें होनी चाहिए। पीठ ने कहा, कुछ आवश्यक शर्तें होनी चाहिए, जिनसे विचलित नहीं हुआ जा सकता। शर्तें खरीदारों के हित में होने चाहिए।
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पीठ ने कहा कि रेरा एक केंद्रीय कानून है और इसलिए रेरा के तहत नियुक्त केंद्रीय सलाहकार समिति को मॉडल एग्रीमेंट को तैयार करने पर विचार करना चाहिए। मेहता ने अदालत की चिंताओं पर हामी भरते हुए कहा कि वह रेरा के प्रावधानों की जांच करेंगे और राष्ट्रीय मॉडल बिल्डर-बायर्स अग्रीमेंट की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए संबंधित अथॉरिटी के साथ विचार-विमर्श करेंगे। जिसके बाद पीठ ने सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टालते हुए सॉलिसिटर जनरल को इस संबंध में निर्देश लाने के लिए कहा।


उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि मॉडल बिल्डर बायर अग्रीमेंट से रियल इस्टेट में पारदर्शिता आएगी और फ्लैट खरीदारों को धोखाधड़ी का सामना नहीं करना पड़ेगा। याचिका में कहा वय है कि वर्तमान में रियल इस्टेट के तमाम अग्रीमेंट एकतरफा और मनमाने होते हैं। इस मामले में केंद्र सरकार ने गत नवंबर में हलफनामा दायर कर कहा था कि घर खरीदारों और प्रमोटरों के अधिकारों और हितों को संतुलित करने के लिए रेरा अधिनियम के प्रावधानों के तहत पहले से ही एक मजबूत नियामक तंत्र और एग्रीमेंट फॉर सेल का मसौदा है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और पारदर्शिता रहे। केंद्र ने रेरा की धारा-13 का हवाला देते हुए कहा था कि यह विशेष रूप से एग्रीमेंट फॉर सेल से निपटता है और बगैर एग्रीमेंट फॉर सेल के प्रमोटर को खरीदारों से कोई जमा या अग्रिम स्वीकार करने से प्रतिबंधित करता है।

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