फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme court said That the decision of acquittal should be reversed only when the approach is wrong and unfair

Supreme Court: शीर्ष कोर्ट ने कहा- बरी करने के फैसले को तब ही पलटना चाहिए जब दृष्टिकोण गलत व अनुचित हो

Wed, 22 Dec 2021 10:44 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 22 Dec 2021 10:44 PM IST
सार

सीबीआई ने मुताबिक, 2003 मे भ्रष्टाचार विरोधी शाखा के समक्ष एक शिकायत दर्ज कर दावा किया गया था कि अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता को कंप्यूटरीकृत रेलवे आरक्षण टिकट के बिक्री रैकेट के झूठे मामले में न फंसाने के एवज में रिश्वत मांगी थी।

विज्ञापन
Supreme court said That the decision of acquittal should be reversed only when the approach is wrong and unfair
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि हाईकोर्ट को ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को तब ही पलटना चाहिए जब ट्रायल कोर्ट का दृष्टिकोण न केवल गलत हो बल्कि अनुचित और विकृत भी हो। जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर एक आपराधिक अपील का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की जिसमें ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट दिया गया था। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लि दोषी ठहराया था।

विज्ञापन


पीठ ने कहा, ट्रायल कोर्ट का विचार एक संभावित दृष्टिकोण था जो न तो विकृत है और न ही अनुचित था। वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर किया जाए तो हाईकोर्ट को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था। इस मामले में वर्तमान अपीलकर्ता एक लोक सेवक था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अपीलकर्ता को एक वर्ष की अवधि के कारावास और 5000 रुपये का जुर्माना लगाया था। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता सुमन चंद्रा को आपराधिक कदाचार, रिश्वत लेने समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराधों के लिए दोषी ठहराया था।
विज्ञापन


सीबीआई ने मुताबिक, 2003 मे भ्रष्टाचार विरोधी शाखा के समक्ष एक शिकायत दर्ज कर दावा किया गया था कि अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता को कंप्यूटरीकृत रेलवे आरक्षण टिकट के बिक्री रैकेट के झूठे मामले में न फंसाने के एवज में रिश्वत मांगी थी। हालांकि वह रिश्वत देने के लिए तैयार नहीं हुआ। उनके द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और अपीलकर्ता को रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed