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सुप्रीम कोर्ट: डेवलपर्स से एकत्र विकास शुल्क का उसी जिले में हो इस्तेमाल, राशि का रिकॉर्ड रखने का दिया निर्देश

Mon, 28 Feb 2022 04:32 AM IST
Jeet Kumar राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 28 Feb 2022 04:32 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने यह आदेश बुधवार को क्रेडाई के हरियाणा चैप्टर और कई डेवलपर्स द्वारा दायर याचिकाओं पर दिया है। याचिका में राज्य सरकार द्वारा ईडीसी की मांग और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी को लेकर शिकायत की गई थी।

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Supreme Court said that development fee collected from the developers should be used in same district
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा रियल एस्टेट डेवलपर्स से बाहरी विकास शुल्क (ईडीसी) के रूप में एकत्र किए गए धन को किसी अलग शहर या जिले को देने के बजाय उसी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास में खर्च किया जाना चाहिए।

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शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार को बिल्डरों से एकत्र किए गए ईडीसी पर नवीनतम आंकड़े और राज्य के विभिन्न जिलों के विकास के लिए खर्च की गई राशि का रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह एक क्षेत्र के निवासियों और डेवलपर्स की एक वैध अपेक्षा होगी कि वे अथॉरिटी को दिए पैसे से अपने क्षेत्र के विकास को देखें।
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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा है, प्रथम दृष्ट्या हमारा विचार है कि विकास कार्यों के लिए में ईडीसी के संग्रह और उस क्षेत्र में व्यय के बीच एक मेल होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा है कि जहां अधिक खर्च किया गया है, राज्य सरकार को इसे डेवलपर्स से वसूल करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार को इस संबंध में चार हफ्ते में एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा है।
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शीर्ष अदालत ने यह आदेश बुधवार को क्रेडाई के हरियाणा चैप्टर और कई डेवलपर्स द्वारा दायर याचिकाओं पर दिया है। याचिका में राज्य सरकार द्वारा ईडीसी की मांग और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी को लेकर शिकायत की गई थी।

दरअसल, सुनवाई के दौरान पीठ ने विभिन्न जिलों से एकत्र किए गए ईडीसी और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किए गए धन के बीच भारी अंतर पर राज्य सरकार से सवाल किया था। पीठ ने पाया कि गुरुग्राम जिले से ईडीसी के रूप में एकत्र की गई राशि से करीब 7155 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।

उसी तरह फरीदाबाद में कई सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। वहीं, दूसरी तरफ करनाल, यमुनानगर, पिंजौर जिलों में एकत्र किए गए ईडीसी का दो-तिहाई से अधिक खर्च नहीं हुआ। साफ है कि गुरुग्राम के डेवलपर्स कम भुगतान कर रहे हैं और क्षेत्र में अधिक खर्च किया जा रहा है। पीठ ने कहा है कि राज्य को अन्य शहरों के विकास के लिए धन प्राप्त कर उसे गुरुग्राम में उपयोग करने की बजाय उन क्षेत्रों के विकास पर खर्च की जानी चाहिए, जहां के बिल्डरों से ईडीसी ली जाती है।


डेवलपर्स से प्राप्त ईडीसी का नागरिक सुविधाओं के लिए होता है इस्तेमाल 
 राज्य सरकार द्वारा कई नागरिक सुविधाओं को पूरा करने के लिए डेवलपर्स से ईडीसी को एकत्र किया जाता है और इसका इस्तेमाल किसी एक क्षेत्र की परिधि के भीतर सड़कों, बिजली, जलापूर्ति, सीवर नालियां जैसी नागरिक सुविधाओं के लिए किया जाता है। बिल्डर प्रति वर्ग फुट के आधार पर घर खरीदारों से ईडीसी वसूलता है।

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