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Delhi Metro: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पेड़ काटने से पहले दिल्ली मेट्रो को लेनी होगी वन संरक्षक की मंजूरी

Mon, 29 Nov 2021 10:28 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 29 Nov 2021 10:28 PM IST
सार

प्रीम कोर्ट ने डीएमआरसी और जीएनसीटीडी को शहर में पौधे लगाने के लिए कार्य योजना विकसित करने का निर्देश भी जारी किया है। योजना को 12 सप्ताह के भीतर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

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Supreme Court said That before cutting trees Delhi Metro will have to take the approval of the Conservator of Forests Latest News Update
delhi metro - फोटो : istock

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को चौथे चरण की विस्तार योजना के लिए पेड़ों को काटने से पहले वन संरक्षण अधिनियम के तहत मंजूरी लेनी होगी।  कोर्ट ने डीएमआरसी को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) के तहत पेड़ों की कटाई की अनुमति के लिए मुख्य वन संरक्षक के समक्ष एक आवेदन दायर करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य वन संरक्षक को एक महीने के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ आवेदन पर्यावरण और वन मंत्रालय को देना होगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने डीएमआरसी और जीएनसीटीडी को शहर में पौधे लगाने के लिए कार्य योजना विकसित करने का निर्देश भी जारी किया है। योजना को 12 सप्ताह के भीतर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। केंद्र सरकार को संबंधित नियमों के अनुसार और न्यायालय द्वारा दी गई वन की परिभाषा के अनुसार आवेदन पर विचार करना चाहिए। जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने 11 नवंबर को डीएमआरसी के आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। डीएमआरसी ने तर्क दिया था कि उसे वन मंजूरी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित पेड़ों को काटे जाने का प्रस्ताव है, वह वनक्षेत्र के तहत नहीं आते हैं।
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डीएमआरसी ने जनकपुरी-आरके आश्रम, मौजपुर-मजलिस पार्क और एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर के विस्तार कार्य के लिए 10 हजार से अधिक पेड़ों की पहचान की थी और उन्हें काटने के लिए अपेक्षित अनुमति नहीं मिली थी। उसने आरोप लगाया था कि पेड़ों को काटने के लिए आवश्यक अनुमति की कमी के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है।

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