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SC: अदालत ने कहा- चश्मदीद गवाह नहीं होने पर अपराध की मंशा साबित करना जरूरी, हत्या मामले में दोषी को किया बरी

Sat, 22 Jul 2023 03:48 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 22 Jul 2023 03:48 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अगर मामले में कोई गवाह नहीं है तो अभियोजन पक्ष को अपराध की मंशा साबित करनी होगी। प्रत्यक्ष मामले में मंशा की अहम भूमिका नहीं होती।

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Supreme Court said Motive necessary for commission of crime when there is no eyewitness
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा है कि अगर किसी घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है तो अभियोजन पक्ष के लिए यह आवश्यक है कि वह अपराध की मंशा साबित करे। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला की पीठ ने कहा कि मामले के सभी गवाहों ने बताया है कि याचिकाकर्ता और मृतक के बीच कोई दुश्मनी नहीं थी।

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पीठ ने कहा, अगर मामले में कोई गवाह नहीं है तो अभियोजन पक्ष को अपराध की मंशा साबित करनी होगी। प्रत्यक्ष मामले में मंशा की अहम भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा, अगर मंशा स्थापित नहीं की गई हो या साबित नहीं की गई हो और सीधे प्रत्यक्षदर्शी हो तो मंशा अपना महत्व खो सकती है, लेकिन मौजूदा मामले में यह स्थापित हुआ है कि किसी ने अपराध को होते हुए नहीं देखा। ऐसे में मंशा की अहम भूमिका है।
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शीर्ष अदालत एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने उसे हत्या का दोषी करार देने और उम्रकैद की सजा देने के निचली अदालत के फैसले की पुष्टि की थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक मृतक के रिश्तेदार ने शिकायत की थी कि जब उनका भतीजा घर लौट रहा था तब अपीलकर्ता ने उसकी पिटाई की थी।
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शिकायतकर्ता ने दावा किया कि जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि आरोपी मौके से भाग रहा है और हत्या में प्रयुक्त हथियार वहां पड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मृतक के रिश्तेदार का बयान भरोसे लायक नहीं है और उसके आधार पर दोषी करार देने का फैसला नहीं किया जा सकता।

आदेश में कहा गया है कि जाहिर तौर पर वह एक सरपंच से प्रभावित था, जिसकी घटना के बाद की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी से इनकार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा, चिकित्सीय साक्ष्य अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं करते क्योंकि हमले के हथियार से मृतक को चोट नहीं पहुंची होगी, जैसा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है।


पीठ ने कहा, इस बात का कोई मकसद नहीं था कि अपीलकर्ता बिना किसी कारण के किसी परिचित और दोस्त की हत्या क्यों करेगा। बचाव पक्ष का कहना है कि मृतक शराब के नशे में था और फिसल कर किसी नुकीली चीज पर गिर गया होगा, जिसके परिणामस्वरूप पोस्टमार्टम में चोट लगने की बात सामने आई है।

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