फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme court said Ignoring merit in government jobs constitution violation

सरकारी नौकरियों में मेरिट की अनदेखी करना संविधान का हनन: सुप्रीम कोर्ट

Fri, 26 Feb 2021 04:31 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 26 Feb 2021 04:31 AM IST
विज्ञापन
Supreme court said Ignoring merit in government jobs constitution violation
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि सरकारी नौकरियों में मेरिट के आधार पर ही चयन होना चाहिए। अधिक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर कम मेरिट वालों लोगों का चयन करना संविधान का उल्लंघन है।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने कहा- अधिक अंक पाने वालों की जगह कम मेरिट वालों की नियुक्ति करना गलत
जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने यह टिप्पणी झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखते हुए दी है, जिसमें सब इंस्पेक्टर के पद पर 43 लोगों की नियुक्ति को सही ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने अनियमितताओं को ठीक करने के बाद जारी संशोधित सूची में मेरिट के आधार पर हुई नियुक्तियों को सही माना था।
विज्ञापन


चयन मेरिट के आधार पर ही होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह अपने फैसले में कहा, इसमें कोई संदेह नहीं कि सरकारी नौकरियां मेरिट के आधार पर होनी चाहिए। अधिक अंक हासिल करने वालों की जगह कम मेरिट वाले लोगों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद-14 और 16 के विपरीत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा, 43 याचिकाकर्ताओं को दी गई राहत का मुख्य आधार यह था कि वे पहले ही नियुक्त हो चुके थे और उन्हें उसके लिए सजा नहीं दी जा सकती, जो गलती उन्होंने नहीं की है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया।

यह था पूरा मामला
झारखंड में वर्ष 2008 में सब इंस्पेक्टर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए गए थे। परीक्षा में 382 लोगों का चयन हुआ। लेकिन बाद में अनियमितता की शिकायत पर सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी बनाई। असफल लोगों ने रांची में झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


इस दौरान पहली सूची के तहत हुई 42 लोगों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया, जबकि पुलिस निदेशक की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश के बाद तैयार की गई नई लिस्ट के आधार पर 43 लोगों की नियुक्ति हुई। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अनियमितता के लिए इन 43 अभ्यर्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इन सभी के खिलाफ किसी तरह की धोखाधड़ी या अनियमितता बरतने का आरोप नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed