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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आईआरडीएआई को दिए नियम सरल और स्पष्ट करने के निर्देश, क्या है मामला?
Tue, 21 Jul 2026 04:22 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 21 Jul 2026 04:22 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने वाहन बीमा नीतियों में सीमा पार कवरेज को लेकर एक अहम और ऐतिहासिक निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने आईआरडीएआई को निर्देश दिया है कि नियमों को सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि बीमा कंपनियां किसी भी अस्पष्टता का फायदा उठाकर ग्राहकों का क्लेम न टाल सकें।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वाहन बीमा की पालिसी में सीमा पार कवरेज के लिए नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को इस संबंध में नियमों को एक समान करने के लिए एक मास्टर सर्कुलर जारी करने पर विचार करने को भी कहा।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि बीमा पॉलिसी की भाषा बिल्कुल साफ और स्पष्ट होनी चाहिए। अगर कोई पॉलिसी देश की सीमा से बाहर के क्षेत्रों को कवर करती है, तो उसमें इसका साफ जिक्र होना चाहिए।
पीठ ने चिंता जताते हुए कहा, जब पॉलिसी लिखने वाली बीमा कंपनियां अस्पष्ट नियम बनाती हैं, तो इसका नुकसान आम पॉलिसीधारकों को भुगतना पड़ता है। कई बार कंपनियां इस अस्पष्टता का फायदा उठाकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एक बीमा कंपनी की याचिका को खारिज करते हुए दिया। बीमा कंपनी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को नेपाल में सड़क हादसे का शिकार हुए एक भारतीय व्यक्ति के परिवार को 32.67 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। साल 2010 में दुर्ग से नेपाल जा रही एक बस वहां पहाड़ी से टकरा गई थी, जिसमें ड्राइवर समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। शीर्ष कोर्ट ने बीमा कंपनी को पीड़ित परिवार को तय ब्याज के साथ पूरा मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा।
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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि बीमा पॉलिसी की भाषा बिल्कुल साफ और स्पष्ट होनी चाहिए। अगर कोई पॉलिसी देश की सीमा से बाहर के क्षेत्रों को कवर करती है, तो उसमें इसका साफ जिक्र होना चाहिए।
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पीठ ने चिंता जताते हुए कहा, जब पॉलिसी लिखने वाली बीमा कंपनियां अस्पष्ट नियम बनाती हैं, तो इसका नुकसान आम पॉलिसीधारकों को भुगतना पड़ता है। कई बार कंपनियां इस अस्पष्टता का फायदा उठाकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एक बीमा कंपनी की याचिका को खारिज करते हुए दिया। बीमा कंपनी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को नेपाल में सड़क हादसे का शिकार हुए एक भारतीय व्यक्ति के परिवार को 32.67 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। साल 2010 में दुर्ग से नेपाल जा रही एक बस वहां पहाड़ी से टकरा गई थी, जिसमें ड्राइवर समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। शीर्ष कोर्ट ने बीमा कंपनी को पीड़ित परिवार को तय ब्याज के साथ पूरा मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा।