देवेंद्र फडणवीस की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस की उस याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली जिसमें उन्होंने 2014 के चुनावी हलफनामें में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा कथित तौर पर नहीं देने पर मुकदमें का सामने करने के शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।
Supreme Court today reserved its order on review petition filed by former Maharashtra CM&BJP leader, Devendra Fadnavis, seeking modification of SC's earlier order directing him to face trial for allegedly not disclosing 2 pending criminal cases against him in 2014 poll affidavit. pic.twitter.com/krb7iwoDLD
— ANI (@ANI) February 18, 2020विज्ञापन
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष फडणवीस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ने वाले अन्य उम्मीदवारों के लिए इस मुद्दे के दूरगामी परिणाम होंगे और न्यायालय को एक अक्टूबर 2019 के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
न्यायालय ने पिछले साल अपने फैसले में बंबई उच्च न्यायालय का फैसला निरस्त कर दिया था। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में फडणवीस को क्लीन चिट दे दी थी और कहा था कि वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत कथित अपराध पर मुकदमें का सामना करने के हकदार नहीं हैं।
बहस के दौरान रोहतगी ने कहा कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला दो सूरतों पर चलाया जा सकता है। पहला आरोप तय होने के बाद मामले की जानकारी नहीं देना और दूसरा दोषी ठहराए जाने की जानकारी नहीं देने पर।
उन्होंने पीठ से कहा, ‘यह मेरे भाग्य को कैद कर लेगा। यह एक अहम प्रश्न है क्योंकि यह अनुच्छेद 21 को प्रभावित करता है। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।’ उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला सतीश उइके की अपील पर सुनाया था। उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।