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Supreme Court: राज्य खनिज भूमि पर कर कब से लें... सुप्रीम फैसला सुरक्षित; केंद्र ने दी यह दलील

Thu, 01 Aug 2024 05:38 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 01 Aug 2024 05:38 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्यों की ओर से 1989 से खदानों और खनिजों पर लगाई गई रॉयल्टी की वापसी की मांग का विरोध किया। केंद्र ने कहा, इससे नागरिकों पर असर पड़ेगा और प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार सार्वजनिक उपक्रमों को अपने खजाने से 70,000 करोड़ रुपये चुकाने पड़ेंगे।

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Supreme Court reserved for implementation its decision on tax mineral rich lands
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने की राज्य शक्ति को बरकरार रखने वाले अपने 25 जुलाई के फैसले को पूर्व से लागू किया जाए या आदेश की तारीख से, इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया। इस फैसले से स्पष्ट होगा कि राज्यों को पिछले वर्षों का भी कर मिलेगा या नहीं।

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केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्यों की ओर से 1989 से खदानों और खनिजों पर लगाई गई रॉयल्टी की वापसी की मांग का विरोध किया। केंद्र ने कहा, इससे नागरिकों पर असर पड़ेगा और प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार सार्वजनिक उपक्रमों को अपने खजाने से 70,000 करोड़ रुपये चुकाने पड़ेंगे। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मुद्दे पर दलीलें सुनीं कि क्या राज्यों को 25 जुलाई को दिए गए फैसले के आधार पर पिछला बकाया वसूलने की अनुमति दी जानी चाहिए। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष दलील दी कि मध्य प्रदेश और राजस्थान (भाजपा शासित राज्य) चाहते हैं कि इस फैसले को आगे से लागू किया जाए। मेहता ने जोर देकर कहा कि बकाया राशि का भुगतान पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करने के लिए कहने वाले किसी भी आदेश का बहुआयामी प्रभाव होगा। इससे नए मुकदमों के रास्ते खुलेंगे।
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दोनों पक्षों के लिए होना चाहिए न्याय
दोनों पक्षों के लिए न्याय किए जाने पर जोर देते हुए मेहता ने कहा कि कोर्ट यह कहने पर विचार कर सकता है कि न तो राज्य सरकार पूर्वव्यापी प्रभाव से कोई शुल्क मांग सकती है और न ही भुगतान करने वाले निजी पक्ष या सार्वजनिक उपक्रम धन वापसी की मांग करेंगे।

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  • सुनवाई के दौरान झारखंड खनिज विकास प्राधिकरण का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने फैसले को पूर्वव्यापी बनाने के पक्ष में दलीलें दीं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि फैसला पूर्वव्यापी रूप से लागू होता है तो पिछले बकाया का भुगतान किस्तों में किया जा सकता है।

...तो कंपनियां हो जाएंगी दिवालिया
महानदी कोलफील्ड्स का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने तर्क दिया कि फैसले को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने से कंपनियां दिवालिया हो जाएंगी।

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