फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court reprimanded the Bar Council of India, asked - why are you interfering in educational matters?

Supreme Court: बार काउंसिल ऑफ इंडिया को 'सुप्रीम' फटकार, पूछा- शैक्षिणिक मामलों में हस्तक्षेप क्यों कर रहे?

Tue, 29 Apr 2025 02:44 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 29 Apr 2025 02:44 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक वर्षीय एलएलएम पाठ्यक्रम को रद्द करने और विदेशी एलएलएम की मान्यता रद्द करने के बीसीआई के 2021 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। बीसीआई को लॉ कॉलेजों के पाठ्यक्रम आदि क्यों तय करने चाहिए? किसी शिक्षाविद को इन चीजों पर ध्यान देना चाहिए।

विज्ञापन
Supreme Court reprimanded the Bar Council of India, asked - why are you interfering in educational matters?
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि वे विधि महाविद्यालयों के शैक्षिणिक मामलों में हस्तक्षेप क्यों कर रहे हैं?यह काम शिक्षाविदों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। देश में एक वर्षीय एलएलएम पाठ्यक्रम को रद्द करने और विदेशी एलएलएम की मान्यता रद्द करने के बीसीआई के 2021 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई की। 

विज्ञापन


पीठ ने कहा कि आप शैक्षिणिक मामलों में क्यों हस्तक्षेप कर रहे हैं? बीसीआई को लॉ कॉलेजों के पाठ्यक्रम आदि क्यों तय करने चाहिए? किसी शिक्षाविद को इन चीजों पर ध्यान देना चाहिए। इस देश में वकीलों का एक बहुत बड़ा वर्ग है। आपके पास उनके ज्ञान को मजबूत करने और उनके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की वैधानिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि आप मसौदा तैयार करने की कला, केस, कानूनों को समझने आदि पर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। पाठ्यक्रम को शिक्षाविदों को सौंपा जाना चाहिए।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: 'दोषी व्यक्ति न बना पाएं राजनीतिक पार्टी', इस मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने टाली सुनवाई
विज्ञापन
विज्ञापन


बीसीआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि यह मौजूदा व्यवस्था है, तो पीठ ने टिप्पणी की कि आपने इसे खुद पर थोपा है और दावा किया है कि आप इस देश में एकमात्र प्राधिकारी हैं। तन्खा ने खुलासा किया कि भारत के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हितधारकों की एक समिति का गठन एक वर्षीय और दो वर्षीय एलएलएम डिग्री को समान करने के लिए एक रूपरेखा की जांच और सिफारिश करने के लिए किया गया था।


शीर्ष अदालत ने मौजूदा कानूनी शिक्षा प्रणाली के तहत जमीनी स्तर पर न्यायिक अधिकारियों की तैनाती पर असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने पूछा कि कानूनी शिक्षा में न्यायपालिका प्राथमिक हितधारक है और हमें किस तरह के अधिकारी मिल रहे हैं? क्या वे ठीक से संवेदनशील हैं। क्या उनमें करुणा है। क्या वे जमीनी हकीकत को समझते हैं या फिर केवल यांत्रिक निर्णय देते हैं? पीठ ने कहा कि शिक्षाविद् इन मुद्दों की जांच कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बीसीआई अपनी जिम्मेदारी का ख्याल रखें। देश में करीब 10 लाख वकील हैं और आपको लॉ कॉलेजों का निरीक्षण करने के बजाय उन्हें प्रशिक्षित करने पर ध्यान देना चाहिए।

ये भी पढ़ें:  वकीलों के साथ बदसलूकी पर मुख्य न्यायाधीश ने लिया स्वत: संज्ञान, तीन जजों की पीठ गठित

विधि विवि ने यह कहा
राष्ट्रीय विधि विवि के संघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि बीसीआई न केवल एलएलएम, बल्कि पीएचडी, डिप्लोमा में भी हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है। सिंघवी ने कहा कि  बीसीआई का उद्देश्य कानूनी पेशे में प्रवेश को विनियमित करना था। फिर प्रवेश पर कानून आया। हम दो वर्षीय पाठ्यक्रम (एलएलएम) को खत्म करने के बारे में नहीं कह रहे हैं, लेकिन क्या कोई प्रैक्टिसिंग वकील दो वर्षीय एलएलएम या एक वर्षीय एलएलएम करना पसंद करेगा? शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जवाब मांगा और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से मामले में सहायता करने का अनुरोध किया। 

संबंधित वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed