Supreme Court: 'आप दया के लायक नहीं', आम्रपाली ग्रुप के पूर्व सीएमडी की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई 2019 के अपने फैसले में आम्रपाली ग्रुप का रेरा रजिस्ट्रेशन भी रद्द करने का निर्देश दिया था। साथ ही ग्रुप के भूमि पट्टे निरस्त कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उसकी संपत्तियों को जब्त करने का निर्देश दिया था।
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आम्रपाली ग्रुप के पूर्व सीएमडी अनिल कुमार शर्मा की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने हजारों घर खरीददारों के साथ धोखा किया है, आप किसी सहानुभूति के लायक नहीं हैं। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने अनिल कुमार शर्मा की जमानत याचिका खारिज करते हुए जांच एजेंसी को कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा 'आप सहानुभूति के लायक नहीं'
कोर्ट ने कहा कि आप हजारों घर खरीददारों को धोखा दिया है और उनकी मेहनत से अर्जित की गई गाढ़ी कमाई और बचत को दूसरी जगह निवेश किया। आप किसी सहानुभूति के लायक नहीं हैं। बता दें कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि आम्रपाली ग्रुप ने निवेशकों के पैसों के साथ धोखाधड़ की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रियल एस्टेट ग्रुप के पूर्व सीएमडी अनिल कुमार शर्मा को अन्य निदेशकों के साथ साल 2018 में गिरफ्तार किया गया था।
सामान्य धोखाधड़ी का मामला नहीं
कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए ये भी कहा कि 'इस अपराध की जड़ें काफी गहरी हैं और अदालत को भी इसे निपटने में परेशानी हो रही है। पीठ ने कहा कि आपका मामला सामान्य धोखाधड़ी का नहीं है। हजारों घर खरीददार आपकी वजह से परेशान हो रहे हैं।' गिरफ्तारी के बाद से बीते करीब चार साल से आम्रपाली ग्रुप के निदेशक जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई 2019 के अपने फैसले में आम्रपाली ग्रुप का रेरा रजिस्ट्रेशन भी रद्द करने का निर्देश दिया था। साथ ही ग्रुप के भूमि पट्टे निरस्त कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उसकी संपत्तियों को जब्त करने का निर्देश दिया था।ईडी के साथ ही आर्थिक अपराध शाखा और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय भी आम्रपाली मामले में हुई धोखाधड़ी की जांच में जुटा है।
तेलंगाना मेडिकल कॉलेज की मान्यता बहाल करने संबंधी याचिका पर केंद्र व अन्य को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा तेलंगाना स्थित एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं दिए जाने के खिलाफ संस्थान के 38 छात्रों की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ भटनागर एवं वकील तन्वी दुबे की दलीलों पर गौर किया कि तेलंगाना के एमएनआर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की मान्यता तेलंगाना हाईकोर्ट के एक विशेष आदेश के बावजूद एनएमसी ने बहाल नहीं की है।
उन्होंने दलील दी कि वहां 'पीजी' में पढ़ाई कर रहे छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में फंस गया है। राज्य के संगारेड्डी जिले के फसलवाड़ी स्थित मेडिकल कॉलेज में अलग-अलग पीजी कोर्स में पढ़ाई कर रहे सिम्हाद्रि रविशंकर और 37 अन्य छात्रों ने यह याचिका दायर की है।
एक वकील ने दलील दी कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए पीजी पाठ्यक्रम के लिए एमएनआर कॉलेज की मान्यता बहाल करने के हाईकोर्ट के विशिष्ट आदेश के बाद भी एनएमसी की कथित निष्क्रियता से छात्र काफी परेशान हैं। हाईकोर्ट ने अपना आदेश 28 नवंबर, 2022 को दिया था। याचिका में कहा गया है कि छात्र लगभग एक साल से बिना किसी गलती के परेशान हैं, दुर्भाग्य से इतनी लंबी देरी और हाईकोर्ट के एक विशेष आदेश के बाद भी मान्यता के नवीनीकरण का कोई आदेश अभी तक नहीं आया है। याचिकाकर्ता एमएनआर कॉलेज के पीजी के 2021-22 बैच के पीड़ित अभ्यर्थी हैं।
नियंत्रण व संतुलन के अभाव में सरकार के अत्याचारी बनने का खतरा, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने की टिप्पणी
देश के हर नागरिक को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का अधिकार मिला है। संविधान में इस अधिकार को बहुत महत्व भी दिया गया है क्योंकि अगर राज्य को बिना नियंत्रण और संतुलन के छोड़ दिया हाता है तो उसके एक ‘अत्याचारी संस्था’ में बदलने का खतरा रहता है जो अपने लोगों के नागरिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हरण कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कृष्ण मुरारी ने सीमा शुल्क अधिनियम के तहत एक मामले में खंडित फैसला सुनाते हुए उक्त टिप्पणी की। इस मामले में एक व्यक्ति ने मामले के निपटारे के लिए अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। अनुच्छेद 32 नागरिकों को न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है जब उन्हें लगता है कि उनके मौलिक अधिकारियों का उल्लंघन हुआ है।
जस्टिस मुरारी और जस्टिस संजय करोल की पीठ दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर महंगी घड़ियों समेत अन्य बहुमूल्य सामान के साथ गिरफ्तार एक अनिवासी भारतीय (एनआरआई) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पिछले साल अक्तूबर में एनआरआई को बिना सीमा शुल्क दिए ग्रीन चैनल से बाहर निकलने की कोशिश में गिरफ्तार किया गया था। जस्टिस करोल ने अलग फैसला दिया था।