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SC: बिहार सरकार के आरक्षण बढ़ाने के फैसले को झटका! सुप्रीम कोर्ट का पटना हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक से इनकार

Mon, 29 Jul 2024 11:35 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 29 Jul 2024 11:35 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 65 फीसदी आरक्षण को रद्द करने वाले फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इन्कार कर दिया है।अब पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बिहार सरकार की 10 याचिकाओं पर सितंबर में सुनवाई होगी। 20 जून को पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के अनुसूचित जाति, जनजाति, अत्यंत पिछड़े और अन्य पिछड़े वर्ग का आरक्षण 65 फीसदी तक बढ़ाने वाले कानून को रद्द कर दिया था। पटना हाईकोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार के लिए झटके की तरह देखा जा रहा है।

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Supreme Court refuses to stay Patna High Court order that set aside the increase in reservation for Backwards
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

बिहार में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ा वर्ग को शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक नौकरियों में 65 फीसदी आरक्षण नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के 20 जून के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने बिहार सरकार की ओर से शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक नौकरियों में एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण 50 से बढ़ाकर 65 फीसदी करने के फैसले को खारिज कर दिया था, जिसके बाद बिहार सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया।
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सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ नीतीश कुमार सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर परीक्षण करने का फैसला किया। पीठ ने कहा, हम इस स्तर पर रोक लगाने के इच्छुक नहीं हैं। हम बिहार सरकार की 10 याचिकाओं को सितंबर में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे। बिहार सरकार के वकील श्याम दीवान ने तर्क दिया कि नए कानून के अनुसार बहुत सारे साक्षात्कार चल रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के एक ऐसे ही मामले का जिक्र किया और कहा कि शीर्ष अदालत ने उस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने हालांकि उनकी दलीलों को अनसुना कर दिया। साथ ही फैसले पर रोक लगाने के लिए आवेदन पर नोटिस जारी करने से भी इन्कार कर दिया।
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बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के द़ृष्टिकोण की वैधता पर उठाए सवाल
बिहार सरकार ने याचिका में हाईकोर्ट के इस दृष्टिकोण की वैधता पर सवाल उठाया है कि कोटा वृद्धि ने रोजगार और शिक्षा के मामलों में नागरिकों के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन किया है। राज्य का कहना है कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से किए गए जाति सर्वेक्षण के बाद पारित बिहार पदों और सेवाओं में रिक्तियों का आरक्षण (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए) संशोधन अधिनियम, 2023 को गलत तरीके से रद्द कर दिया।
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जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट छापने वाला एकमात्र राज्य
याचिका में यह भी कहा गया कि बिहार एकमात्र राज्य है जिसने यह अभ्यास किया और पूरी आबादी की सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक स्थितियों पर अपनी जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रकाशित की। राज्य ने कहा कि उसने इस अदालत के बाध्यकारी निर्णयों का अनुपालन किया है और फिर आरक्षण अधिनियमों में संशोधन किया है। हालांकि, हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 16(4) की वास्तविक प्रकृति और महत्व को समझने में विफल रहा, जो कि इंद्रा साहनी (मंडल आयोग), जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल (मराठा कोटा) और कई अन्य मामलों सहित कई मामलों में शीर्ष अदालत की ओर से निर्धारित कानून के अनुसार है।
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